रविवार: को लखनऊ की सड़कों पर विंटेज गाड़ियों की अनोखी चमक देखने को मिली। 40 विंटेज कारें और 5 क्लासिक बाइकें जब शहर की सड़कों पर उतरीं, तो लोग उन्हें देखने के लिए उमड़ पड़े। हजरतगंज चौराहे से शुरू होकर इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान तक निकली यह रैली करीब 20 किलोमीटर लंबी रही, जिसका उद्देश्य लोगों में ट्रैफिक और रोड सेफ्टी को लेकर जागरूकता फैलाना था।
गृह विभाग के प्रमुख सचिव संजय प्रसाद ने हरी झंडी दिखाकर रैली की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि विंटेज कार प्रेमियों का यह समुदाय बेहद वाइब्रेंट है और इन गाड़ियों का संरक्षण अपने आप में जुनून और मेहनत का काम है। उन्होंने बताया कि ऐसे आयोजन लोगों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करते हैं।
विश्वयुद्ध से पहले की वाहन बने आकर्षण का केंद्र
इस रैली में कई ऐसी गाड़ियां शामिल रहीं, जो द्वितीय विश्वयुद्ध से पहले बनाई गई थीं। इनमें 104 साल पुरानी 1923 की बेबी ऑस्टिन, 1927 मॉडल की फोर्ड कार, और ब्रिटिश सैनिकों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली BSA बाइक ने लोगों का खास ध्यान आकर्षित किया।
लखनऊ निवासी राजीव कुमार यादव की 1923 मॉडल वाली बेबी ऑस्टिन लोगों के लिए किसी टाइम मशीन जैसी साबित हुई। यह कार 1989 से उनके पास है और आज भी शानदार स्थिति में चलती है।
“1927 की फोर्ड आज भी मस्त चलती है” — अब्दुल हफीज
विंटेज कार कलैक्टर अब्दुल हफीज ने गर्व से बताया कि उनकी 1927 मॉडल की फोर्ड आज भी बेहतरीन चलती है। लोग इस कार के साथ सेल्फी लेते नजर आए।
विश्वयुद्ध-पूर्व BSA बाइक
फहद अली अपनी द्वितीय विश्व युद्ध से पहले की BSA बाइक लेकर पहुंचे, जो कभी अंग्रेज सैनिक इस्तेमाल करते थे। बाइक की गूंज और क्लासिक स्टाइल लोगों को पुराने ज़माने में ले गई।
आशा पारेख की कार भी पहुंची रैली में
इस रैली में एक खास आकर्षण रही फिल्म अभिनेत्री आशा पारेख की विंटेज कार। अनुज राजपूत ने बताया कि उनके बड़े पिता ने यह कार आशा पारेख से खरीदी थी। उस समय एक्ट्रेस ने इसे खराब बताते हुए बेच दिया था, लेकिन परिवार ने इसे संजोकर अब तक बेहतरीन हालत में रखा है।
लोगों की भीड़ और सेल्फी का दौर
रैली के दौरान लोग रास्ते भर खड़े होकर इन क्लासिक मशीनों की वीडियो और फोटो बनाते दिखे। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर कोई इन पुराने दौर की गाड़ियों को देखकर रोमांचित था।


