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शंकराचार्य का भागवत पर तंज- खुद शादी कर बच्चे क्यों नहीं करते?: बोले- जो हमारी सुनेगा, उसी का करेंगे समर्थन

उत्तर प्रदेश: के बरेली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान Swami Avimukteshwaranand Saraswati के बयान ने सियासी और सामाजिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख Mohan Bhagwat के जनसंख्या बढ़ाने संबंधी बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सवाल उठाया कि अगर जनसंख्या बढ़ाना इतना जरूरी है तो खुद शादी कर बच्चे क्यों नहीं पैदा करते।

शंकराचार्य ने कहा कि एक तरफ सरकार जनसंख्या विस्फोट की चिंता जताती है, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग तीन बच्चे पैदा करने की बात करते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “दूसरों पर बोझ डालने से पहले खुद उदाहरण पेश करना चाहिए।” उनका यह बयान सीधे तौर पर भागवत के उस कथन के संदर्भ में था, जिसमें उन्होंने कहा था कि हिंदुओं को कम से कम तीन बच्चे पैदा करने चाहिए।

यह मुद्दा हाल ही में और ज्यादा चर्चा में आया था, जब भागवत ने एक कार्यक्रम में कहा था कि तीन बच्चों वाले परिवार में संतुलन और बेहतर मानसिक विकास की संभावना अधिक होती है। इसी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य ने यह टिप्पणी की।

राजनीतिक समर्थन के सवाल पर भी शंकराचार्य ने स्पष्ट रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि वे किसी राजनीतिक दल के साथ नहीं हैं, लेकिन जो भी उनकी बातों को सुनेगा और गो-रक्षा जैसे मुद्दों पर कानून बनाएगा, वे उसके साथ खड़े होंगे। उन्होंने जनता से भी अपील की कि वे मतदान करते समय गो-माता की रक्षा जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दें।

इस बयान के साथ ही उन्होंने राजनीति के मौजूदा स्वरूप पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि आज सत्ता और विपक्ष दोनों ही अपने-अपने स्वार्थ में उलझे हुए हैं, जबकि असली मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। उन्होंने कहा कि देश की जनता को ऐसे मुद्दों पर जागरूक होना चाहिए और सही निर्णय लेना चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय मामलों पर भी शंकराचार्य ने अपनी राय रखी। उन्होंने अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी तनाव पर चिंता जताते हुए कहा कि दुनिया के विद्वान इस मुद्दे पर चुप हैं, जो कि मानवता के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि हर युद्ध में एक पक्ष न्याय का होता है और दूसरा अन्याय का, और विद्वानों का कर्तव्य है कि वे इस पर स्पष्ट रूप से अपनी बात रखें।

प्रधानमंत्री Narendra Modi के इस मुद्दे पर रुख को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा गुटनिरपेक्ष रहने की रही है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि भारत किस पक्ष में खड़ा है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वे इस पर सीधा आरोप नहीं लगाना चाहते, लेकिन स्पष्टता जरूरी है।

शंकराचार्य ने यह भी कहा कि युद्ध का असर आम जनता पर पड़ता है। उन्होंने गैस सिलेंडर और अन्य जरूरी वस्तुओं की बढ़ती कीमतों का जिक्र करते हुए कहा कि आम लोग परेशान हैं, जबकि सत्ता में बैठे लोगों को इसका एहसास नहीं होता।

उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और धार्मिक दोनों ही क्षेत्रों में प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। जहां कुछ लोग इसे बेबाक और सच्चा बयान मान रहे हैं, वहीं कुछ इसे विवादास्पद बता रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बयान आने वाले समय में जनसंख्या नीति और धार्मिक नेतृत्व की भूमिका पर नई बहस को जन्म दे सकते हैं। फिलहाल यह मामला राजनीतिक गलियारों में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।

शंकराचार्य के बयान ने जनसंख्या, राजनीति और धर्म से जुड़े मुद्दों पर नई बहस छेड़ दी है। आने वाले समय में इस पर और प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं, जिससे सियासी माहौल और गरमाने की संभावना है।

News Desk

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