DUSU Election Result 2026: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ यानी DUSU Election 2026 के नतीजों का इंतजार अब खत्म होने वाला है। शुक्रवार को हुए मतदान के बाद शनिवार, 19 सितंबर 2026 को चार केंद्रीय पदों के लिए वोटों की गिनती शुरू होगी। मतगणना सुबह 8 बजे से शुरू होने की जानकारी सामने आई है। इसके साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के पदों पर किसे जीत मिलेगी, इसकी तस्वीर भी सामने आने लगेगी।
इस बार चुनाव में मुख्य मुकाबला अलग-अलग छात्र संगठनों के उम्मीदवारों के बीच है। अध्यक्ष पद पर ABVP के यश डबास, NSUI के विजय शंकर मीणा और AISA-SFI गठबंधन की अनन्या रतूड़ी समेत कुल सात उम्मीदवार मैदान में हैं। यानी अध्यक्ष पद के लिए मुकाबला केवल दो उम्मीदवारों तक सीमित नहीं है।
सुबह 8 बजे से शुरू होगी मतगणना
DUSU के चार केंद्रीय पदों के लिए शुक्रवार को मतदान कराया गया था। NDTV की 19 सितंबर की लाइव रिपोर्ट के मुताबिक मतगणना सुबह 8 बजे शुरू होनी है और नतीजे आज ही सामने आने की उम्मीद है। मतदान के दौरान 1.51 लाख से अधिक छात्र मतदाता सूची में शामिल थे।
जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार शाम सात बजे तक मतदान प्रतिशत 39.78 फीसदी दर्ज किया गया था, हालांकि बाद के अपडेट में मतदान प्रतिशत 40.46 फीसदी बताया गया। इसलिए अंतिम आधिकारिक आंकड़े के आधार पर ही अंतिम मतदान प्रतिशत माना जाना चाहिए।
अध्यक्ष पद पर सात उम्मीदवार
इस बार DUSU अध्यक्ष पद के लिए कुल सात प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इनमें प्रमुख नाम हैं—
- यश डबास — ABVP
- विजय शंकर मीणा — NSUI
- अनन्या रतूड़ी — AISA-SFI
- अश्मित पवार
- एजाज मंसूरी
- समर्थ बेनीवाल
- समीर कुमार
इनमें ABVP, NSUI और AISA-SFI गठबंधन के उम्मीदवारों पर खास नजर है। हालांकि अंतिम फैसला वोटों की गिनती के बाद ही होगा।

चार पदों के लिए 20 उम्मीदवार
DUSU चुनाव में इस बार अध्यक्ष के अलावा उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के पदों के लिए भी मुकाबला हुआ। जागरण के अनुसार चार केंद्रीय पदों पर कुल 20 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं।
उपाध्यक्ष पद पर ABVP के इशू मौर्य, NSUI के वीर छत्रथ और AISA-SFI के अक्षत शिखर समेत पांच उम्मीदवार हैं।
सचिव पद पर ABVP की रिया छावड़ी, NSUI की नम्रता चौधरी, AISA-SFI की स्टैनज़िन डेस्क्योंग और ASAP के पंकज कुमार उम्मीदवार हैं।
संयुक्त सचिव पद पर ABVP के लक्ष्य राज सिंह, NSUI के गोपाल चौधरी, AISA-SFI के बी परिजात और विशेष यादव मैदान में हैं।
EV M और बैलेट पेपर दोनों से हुआ मतदान
इस बार डूसू चुनाव की मतदान प्रक्रिया में EVM और बैलेट पेपर दोनों का इस्तेमाल किया गया। जागरण के मुताबिक 10 कॉलेजों में बैलेट पेपर से मतदान कराया गया, जबकि बाकी कॉलेजों में EVM का इस्तेमाल हुआ।
विश्वविद्यालय की ओर से करीब एक हजार EVM की व्यवस्था की गई थी। इनमें 960 मशीनों का मतदान के लिए इस्तेमाल किया गया और बाकी मशीनें रिजर्व में रखी गई थीं। मतदान के दौरान किसी बड़ी तकनीकी समस्या की शिकायत सामने नहीं आने की बात भी बताई गई।
52 केंद्रों पर मतदान, सुरक्षा के कड़े इंतजाम
डूसू चुनाव को देखते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ और साउथ कैंपस में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई थी। जागरण के अनुसार कुल 158 मतदान बूथ और 52 मतदान केंद्र बनाए गए थे।
कॉलेजों के आसपास बैरिकेडिंग और तलाशी की व्यवस्था की गई थी। विश्वविद्यालय परिसर में दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती भी की गई। मतदान से पहले अभियान के दौरान कैंपस में तनाव और झड़पों की खबरों के कारण सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरती गई।
दिल्ली हाईकोर्ट ने जीत के जुलूस पर लगाई रोक
नतीजों से पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने DUSU चुनाव को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। अदालत ने परिणाम घोषित होने के बाद विजय जुलूस निकालने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने चुनाव अभियान के दौरान नियमों के कथित उल्लंघन और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी चिंता जताई थी।
इसका मतलब है कि जीत के बाद उम्मीदवारों और समर्थकों को विश्वविद्यालय परिसर, हॉस्टल या सार्वजनिक सड़कों पर जुलूस निकालने की अनुमति नहीं होगी। अदालत ने निर्देश का उल्लंघन होने पर आपराधिक और प्रशासनिक कार्रवाई के साथ अवमानना की कार्यवाही की चेतावनी भी दी है।
किसके हाथ आएगी अध्यक्ष की कमान?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी किस उम्मीदवार को मिलेगी। शुक्रवार को मतदान पूरा हो चुका है और शनिवार सुबह से मतगणना शुरू होने के साथ ही रुझान सामने आने लगेंगे।
हालांकि, मतदान प्रतिशत, अभियान के दौरान सामने आए दावे या कॉलेज स्तर के चुनावों के परिणामों के आधार पर DUSU केंद्रीय पदों के विजेता का निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा। कॉलेज यूनियन के चुनाव और DUSU के केंद्रीय पैनल के परिणाम अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं।
इसलिए अध्यक्ष समेत चारों केंद्रीय पदों का अंतिम फैसला मतगणना के आधिकारिक परिणाम से ही होगा।


