वॉशिंगटन/नई दिल्ली। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने विवादित बयानों की वजह से सुर्खियों में हैं।
व्हाइट हाउस में यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की से मुलाकात के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा और वह रूसी तेल सौदे से पीछे हट रहा है।
हालांकि भारत सरकार पहले ही ऐसे दावों को सिरे से खारिज कर चुकी है और बार-बार यह स्पष्ट कर चुकी है कि भारत अपने ऊर्जा हितों के अनुसार ही निर्णय लेता है, किसी तीसरे देश के दबाव में नहीं।
🇺🇸 व्हाइट हाउस में फिर दोहराया बेतुका दावा
बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा कि उनके प्रशासन ने रूस पर कठोर प्रतिबंध लगाने के बजाय, भारत और यूरोपीय देशों को रूस से तेल खरीद बंद करने पर ध्यान दिया।
ट्रंप के मुताबिक, ऐसा करने से रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा और वह अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करेगा।
ट्रंप ने कहा —
“भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा, वे पीछे हट रहे हैं। हम सभी को मिलकर रूस को कमजोर करना होगा।”
हालांकि, भारत की विदेश मंत्रालय की ओर से पहले ही इस तरह के बयानों पर प्रतिक्रिया दी जा चुकी है कि भारत अपने नागरिकों और ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देता है।
⚔️ भारत-पाकिस्तान संघर्ष का फिर जिक्र
ट्रंप ने अपने बयान में एक बार फिर भारत-पाकिस्तान संघर्ष का मुद्दा छेड़ दिया।
उन्होंने दावा किया कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान “आठ युद्ध सुलझा दिए”, और अगला उनका “नौवां समाधान” होगा।
ट्रंप ने कहा —
“रवांडा और कांगो जाओ, भारत और पाकिस्तान की बातें करो — मैंने सब सुलझा दिया। दुनिया जानती है कि मैं विवाद खत्म करता हूं।”
उनके इस दावे पर कई राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे “असत्य और अतिशयोक्ति” बताया है, क्योंकि उनके कार्यकाल में किसी भी बड़े अंतरराष्ट्रीय संघर्ष का स्थायी समाधान नहीं हुआ था।
🏅 नोबेल पुरस्कार को लेकर फिर छलका दर्द
बातचीत के दौरान ट्रंप ने नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने पर भी अपनी नाराज़गी दोहराई।
उन्होंने कहा कि जब-जब उन्होंने कोई विवाद सुलझाया, लोगों ने कहा कि उन्हें नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए,
पर उन्हें नहीं मिला — “किसी और को मिला, जो बहुत अच्छी महिला है।”
ट्रंप ने कहा —
“मुझे फर्क नहीं पड़ता, मैं बस जानें बचाना चाहता हूं।”
🌍 ‘दस लाख जिंदगियां बचाने’ का दावा
अपने बयानों की श्रृंखला में ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्होंने अपने निर्णयों से
“दस लाख से ज्यादा लोगों की जान बचाई” है।
उन्होंने यहां तक कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने भी इस बात को स्वीकार किया कि
उनकी वजह से लाखों जिंदगियां बचीं।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी, तो वह अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच के संघर्ष को भी सुलझा सकते हैं,
लेकिन फिलहाल उनका ध्यान “अमेरिका को चलाने पर” है।
📰 भारत की स्थिति स्पष्ट: ऊर्जा नीति अपने हित में तय होती है
भारत ने पहले भी कई मौकों पर कहा है कि रूस से तेल खरीदना किसी राजनीतिक निर्णय का हिस्सा नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा की आवश्यकता है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बार-बार कहा है कि भारत “अपनी जनता के हितों को देखते हुए निर्णय लेता है” और
तेल खरीद में किसी देश के दबाव में नहीं आता।
भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद को लगातार बढ़ाया है क्योंकि इससे उसे सस्ते दाम पर ऊर्जा आपूर्ति मिल रही है,
जिससे घरेलू महंगाई को नियंत्रित रखने में मदद मिली है।


