बल्लभगढ़ (फरीदाबाद)। दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में बढ़ते वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। इसी क्रम में दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य दिल्ली-एनसीआर के शहरों के लिए तैयार की गई शहर-विशेष कार्ययोजनाओं के प्रभावी और सख्त जमीनी क्रियान्वयन की समीक्षा करना था।
इस बैठक में फरीदाबाद नगर निगम कमिश्नर धीरेंद्र खड़गटा ने हिस्सा लिया और फरीदाबाद जिले के लिए आगामी वर्ष का विस्तृत वायु प्रदूषण नियंत्रण एक्शन प्लान प्रस्तुत किया।
फरीदाबाद नगर निगम की पहल को मिली विशेष सराहना
बैठक के दौरान निगम कमिश्नर धीरेंद्र खड़गटा ने बताया कि वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए फरीदाबाद नगर निगम द्वारा किए जा रहे प्रयासों की केंद्रीय मंत्रालय स्तर पर विशेष सराहना की गई है। खासतौर पर नगर निगम द्वारा संचालित पॉट होल रिपेयर एंड मेंटेनेंस वैन को एक अभिनव और प्रभावी पहल बताया गया।
इस वैन के जरिए सड़कों पर बने गड्ढों की त्वरित मरम्मत की जाती है, जिससे यातायात सुचारु होता है और वाहनों की आवाजाही के दौरान उड़ने वाली धूल पर भी नियंत्रण पाया जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया रोल मॉडल
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने फरीदाबाद मॉडल की सराहना करते हुए कहा कि सड़क गड्ढों की समय पर मरम्मत से केवल ट्रैफिक व्यवस्था ही बेहतर नहीं होती, बल्कि यह वायु प्रदूषण को कम करने का भी एक कारगर उपाय है।
उन्होंने कहा कि गड्ढों के कारण वाहनों की धीमी गति और बार-बार ब्रेक लगाने से धूल का स्तर बढ़ता है, जिसे इस तरह की मरम्मत वैन के जरिए प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।
एनसीआर के अन्य शहरों को अपनाने की सलाह
केंद्रीय मंत्री ने दिल्ली सहित एनसीआर के अन्य शहरों को भी फरीदाबाद नगर निगम के इस मॉडल को अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यदि सभी नगर निकाय इस तरह की व्यावहारिक और त्वरित समाधान वाली योजनाओं को लागू करें, तो क्षेत्र में वायु गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार संभव है।
दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या से निपटने के लिए फरीदाबाद नगर निगम द्वारा अपनाया गया पॉट होल रिपेयर मॉडल एक प्रभावी उदाहरण बनकर उभरा है। केंद्रीय स्तर पर मिली सराहना से यह स्पष्ट है कि स्थानीय स्तर की व्यावहारिक पहलें बड़े स्तर पर पर्यावरण सुधार में अहम भूमिका निभा सकती हैं।


