उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर जनता का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। आगरा, फिरोजाबाद और आसपास के कई जिलों में महिलाओं ने स्मार्ट मीटर के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। कई जगहों पर महिलाओं ने अपने घरों से स्मार्ट मीटर उखाड़कर सिर पर रखे और सीधे बिजली विभाग के कार्यालय पहुंच गईं। वहां उन्होंने मीटर फेंककर विरोध जताया। इस पूरे घटनाक्रम के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।
प्रदर्शन कर रही महिलाओं का आरोप है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली बिल अचानक कई गुना बढ़ गए हैं। लोगों का कहना है कि पहले जहां 500 से 1000 रुपये तक बिल आता था, वहीं अब हजारों रुपये के बिल भेजे जा रहे हैं। इससे आम परिवारों का बजट बिगड़ गया है।
आगरा में बड़ी संख्या में महिलाएं और स्थानीय लोग बिजली विभाग के दफ्तर पहुंचे। कई महिलाओं ने अपने हाथों में स्मार्ट मीटर उठाए हुए थे। प्रदर्शन के दौरान जमकर नारेबाजी हुई और लोगों ने बिजली विभाग के खिलाफ नाराजगी जताई।
प्रदर्शन कर रही एक महिला ने कहा, “हम गरीब लोग हैं। पहले कम बिल आता था, लेकिन स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिल इतना बढ़ गया कि घर चलाना मुश्किल हो गया है। हमने कई बार शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।”
फिरोजाबाद में भी इसी तरह का नजारा देखने को मिला। वहां महिलाओं ने स्मार्ट मीटर हटाकर विभागीय कार्यालय के बाहर फेंक दिए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सरकार और बिजली कंपनियां स्मार्ट मीटर के जरिए जनता से ज्यादा पैसे वसूल रही हैं।
इस पूरे विवाद पर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए कहा, “जनता ने चोरी पकड़ ली है।” अखिलेश यादव का यह बयान तेजी से वायरल हो गया और राजनीतिक माहौल भी गर्मा गया।

सपा नेताओं ने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर योजना में पारदर्शिता नहीं है और इससे आम जनता को आर्थिक नुकसान हो रहा है। विपक्ष का कहना है कि सरकार को पहले लोगों की शिकायतें सुननी चाहिए और फिर इस योजना को लागू करना चाहिए।
दूसरी ओर, बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि स्मार्ट मीटर आधुनिक तकनीक पर आधारित हैं और इससे बिजली खपत का सटीक आंकड़ा मिलता है। विभाग का दावा है कि कई मामलों में उपभोक्ताओं की बिजली खपत पहले से ज्यादा होने के कारण बिल बढ़े हैं, जबकि कुछ लोग मीटर की कार्यप्रणाली को ठीक से समझ नहीं पा रहे हैं।
हालांकि, जनता का गुस्सा लगातार बढ़ता नजर आ रहा है। कई जगहों पर लोगों ने मांग की है कि स्मार्ट मीटर हटाकर पुराने मीटर दोबारा लगाए जाएं। लोगों का आरोप है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद गलत रीडिंग और तेज बिलिंग की समस्या बढ़ गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्मार्ट मीटर का मुद्दा आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा विषय बन सकता है। खासतौर पर ग्रामीण और मध्यम वर्गीय परिवारों में इसे लेकर नाराजगी बढ़ती दिखाई दे रही है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में महिलाएं गुस्से में स्मार्ट मीटर सिर पर रखकर नारे लगाती दिखाई दे रही हैं। कुछ वीडियो में लोग विभागीय कर्मचारियों से तीखी बहस करते भी नजर आ रहे हैं।
ऊर्जा विभाग के सूत्रों के अनुसार, सरकार पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और शिकायतों की समीक्षा की जा रही है। जरूरत पड़ने पर तकनीकी जांच भी कराई जा सकती है। हालांकि फिलहाल सरकार की ओर से स्मार्ट मीटर योजना वापस लेने का कोई संकेत नहीं मिला है।
विशेषज्ञों का कहना है कि स्मार्ट मीटर भविष्य की जरूरत हैं क्योंकि इससे बिजली चोरी रोकने और रियल टाइम मॉनिटरिंग में मदद मिलती है। लेकिन यदि उपभोक्ताओं को सही जानकारी और पारदर्शिता नहीं मिलेगी, तो विरोध बढ़ना तय है।
फिलहाल यूपी में स्मार्ट मीटर को लेकर छिड़ा यह विवाद थमता नजर नहीं आ रहा। आने वाले दिनों में यदि शिकायतों का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज हो सकता है।
उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर के खिलाफ जनता का विरोध अब खुलकर सामने आ चुका है। महिलाओं द्वारा मीटर उखाड़कर बिजली विभाग कार्यालय में फेंकना इस नाराजगी की बड़ी तस्वीर दिखाता है। विपक्ष भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमलावर है। अब देखना होगा कि सरकार और बिजली विभाग लोगों की शिकायतों का समाधान कैसे करते हैं।


