डोनाल्ड ट्रंप: के जनवरी 2025 में दोबारा अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के साथ ही भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है, खासकर ऊर्जा सेक्टर में। 2025 की पहली छमाही में भारत ने अमेरिका से जितना कच्चा तेल आयात किया, वह पिछले साल की तुलना में 51% ज्यादा है।
इसके अलावा, तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) के आयात में भी रिकॉर्ड तेजी दर्ज की गई है। विश्लेषकों के अनुसार, यह बढ़ोतरी भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक ऊर्जा सहयोग का परिणाम है, जिसकी नींव ट्रंप-मोदी ऊर्जा समझौते से रखी गई थी।
फरवरी 2025 में ट्रंप-मोदी ऊर्जा समझौता बना मुख्य टर्निंग पॉइंट
फरवरी 2025 में डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुए द्विपक्षीय ऊर्जा समझौते के बाद भारत ने अमेरिका से अपनी ऊर्जा खरीद को तेजी से बढ़ाया है। समझौते में भारत ने घोषणा की थी कि वह 2024 तक 15 अरब डॉलर की ऊर्जा खरीद को 2025 में 25 अरब डॉलर तक पहुंचाएगा।
इसके अलावा, दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। यह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि भारत अब अमेरिका को अपनी ऊर्जा सुरक्षा का एक प्रमुख स्तंभ मान रहा है।
कच्चे तेल की खरीद में 114% की तिमाही वृद्धि, अमेरिका की हिस्सेदारी 8%
भारत का अमेरिका से कच्चे तेल का आयात वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में 114% बढ़कर 3.7 अरब डॉलर हो गया, जो इससे पहले सिर्फ 1.73 अरब डॉलर था। जुलाई 2025 में भारत ने जून की तुलना में 23% ज्यादा अमेरिकी तेल खरीदा।
अब भारत के कुल तेल आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 8% हो गई है, जो पहले मात्र 3% थी। यह बदलाव अमेरिका को भारत का एक विश्वसनीय और रणनीतिक ऊर्जा आपूर्तिकर्ता बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
एलएनजी डील्स में भारत की दिलचस्पी बढ़ी, कीमत और सप्लाई दोनों फायदेमंद
रेटिंग एजेंसी ICRA के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रशांत वशिष्ठ के अनुसार, अमेरिका से एलएनजी खरीदना भारतीय कंपनियों के लिए काफी फायदेमंद है क्योंकि:
- मूल्य निर्धारण अमेरिका के ‘हेनरी हब’ बेंचमार्क पर आधारित है जो सस्ता है।
- अमेरिका में लगातार नई एलएनजी परियोजनाएं शुरू हो रही हैं जिससे आपूर्ति स्थिर और दीर्घकालिक अनुबंध आसान हो गए हैं।
वित्त वर्ष 2023-24 में एलएनजी आयात 1.41 अरब डॉलर था, जो 2024-25 में बढ़कर 2.46 अरब डॉलर हो गया है।
बाइडन प्रशासन की नीतियां हटाईं, एलएनजी निर्यात पर खुला रास्ता
राष्ट्रपति बनते ही डोनाल्ड ट्रंप ने बाइडन प्रशासन की गैस निर्यात लाइसेंस पर रोक हटाकर ऊर्जा निर्यात को फिर से खोल दिया। इसके चलते अमेरिका की एलएनजी निर्यात क्षमता में 2028 तक दोगुनी बढ़ोतरी की उम्मीद है।
अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन का कहना है कि इस विस्तार का अधिकांश हिस्सा अमेरिका द्वारा ही निर्यात किया जाएगा, जिससे भारत जैसे देशों को लंबे समय तक ऊर्जा आपूर्ति मिल सकेगी।
2030 तक तेल मांग में भारत बनेगा विश्व का अगुवा
भारत की ऊर्जा मांग में यह बढ़ोतरी ऐसे समय हो रही है जब वह दुनिया में सबसे तेजी से तेल की मांग बढ़ाने वाला देश बनता जा रहा है। अनुमान है कि 2030 तक भारत तेल की मांग में चीन को भी पीछे छोड़ देगा। एलएनजी की मांग भी 78% बढ़कर 64 बिलियन क्यूबिक मीटर तक पहुंचने की संभावना है।
लंबी अवधि की एलएनजी डील्स पर बातचीत जारी
सूत्रों के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच अरबों डॉलर की दीर्घकालिक एलएनजी डील्स पर बातचीत चल रही है। भारत की बड़ी तेल और गैस कंपनियां सीधे अमेरिकी कंपनियों से अनुबंध की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
हालांकि, रूस से भारत की तेल खरीद पर ट्रंप प्रशासन ने चिंता जताई है और चाहता है कि भारत रूस पर दबाव बनाए ताकि यूक्रेन युद्ध खत्म हो सके।
निष्कर्ष:
ट्रंप की वापसी ने भारत-अमेरिका ऊर्जा संबंधों को नई ऊर्जा और रणनीतिक दिशा दी है। कच्चा तेल, एलएनजी और दीर्घकालिक डील्स से जुड़ी यह उछाल दोनों देशों को न केवल आर्थिक लाभ पहुंचा रही है, बल्कि भविष्य की वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और भू-राजनीतिक स्थिरता की राह भी तैयार कर रही है।


