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आज पंचतत्व में विलीन होंगे दिशोम गुरु शिबू सोरेन: नेमरा में होगा अंतिम संस्कार, राहुल गांधी और केजरीवाल देंगे विदाई

झारखंड आंदोलन के नायक, पूर्व मुख्यमंत्री और झामुमो संस्थापक शिबू सोरेन को आज नेमरा गांव में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी। देशभर के राजनीतिक दिग्गज पहुंचेंगे।

रांची/रामगढ़। झारखंड के आंदोलनकारी नेता, झामुमो के संस्थापक, पूर्व मुख्यमंत्री और ‘दिशोम गुरु’ के नाम से प्रसिद्ध शिबू सोरेन आज पंचतत्व में विलीन हो जाएंगे। उनका अंतिम संस्कार मंगलवार को रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। इस ऐतिहासिक क्षण में देश के तमाम बड़े नेता और हजारों की संख्या में आमजन शामिल होंगे।


रांची से नेमरा तक श्रद्धांजलि की श्रृंखला

मंगलवार सुबह शिबू सोरेन के पार्थिव शरीर को पहले रांची स्थित झारखंड विधानसभा और फिर झामुमो के केंद्रीय कार्यालय ले जाया जाएगा। वहां पर पार्टी कार्यकर्ता, आमजन और राजनीतिक प्रतिनिधि उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
विधानसभा में एक शोकसभा का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें उनके जीवन, संघर्ष और झारखंड आंदोलन में दिए गए ऐतिहासिक योगदान को याद किया जाएगा।


दोपहर 3 बजे नेमरा गांव में अंतिम संस्कार

शाम 3 बजे, उनका अंतिम संस्कार पैतृक गांव नेमरा में संपन्न होगा। अंतिम यात्रा में झारखंड, बिहार और दिल्ली से लेकर देश के अन्य हिस्सों से भी लोग पहुँच रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, राज्य सरकार के मंत्री, झामुमो पदाधिकारी, विपक्षी दलों के नेता और हजारों श्रद्धालु इस ऐतिहासिक विदाई में शामिल होंगे।


मोरहाबादी में जनसैलाब, गुरुजी को दी अंतिम विदाई

सोमवार को बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से उनका पार्थिव शरीर मोरहाबादी मैदान स्थित आवास पर लाया गया। यहां सुबह से ही श्रद्धांजलि देने वालों की लंबी कतारें लगी रहीं।
युवा, बुजुर्ग, महिलाएं, आदिवासी समुदाय के प्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों ने भावुक होकर गुरुजी को विदाई दी। कई लोग फूट-फूट कर रोते देखे गए।

इस दौरान झारखंड सरकार के सभी मंत्री, विधायक, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, भाजपा, आजसू और अन्य दलों के प्रतिनिधियों ने माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।


“एक युग का अंत” – नेताओं की भावुक प्रतिक्रियाएं

कई वरिष्ठ नेताओं ने इसे एक युग का अंत करार दिया। शिबू सोरेन को झारखंड राज्य के निर्माण में आधार स्तंभ माना जाता है। उन्होंने आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए संघर्ष करते हुए अपनी पूरी जिंदगी समर्पित कर दी।


गुरुजी की विरासत: संघर्ष, आंदोलन और सादगी

शिबू सोरेन न केवल एक राजनेता बल्कि एक जनआंदोलन के प्रतीक थे। उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना कर आदिवासी समाज को आवाज दी और पूरे भारत को झकझोर देने वाला आंदोलन खड़ा किया।
उनकी जीवनशैली सादा, विचार स्पष्ट और जनता के लिए समर्पित रही।


निष्कर्ष:

झारखंड की आत्मा कहे जाने वाले शिबू सोरेन आज पंचतत्व में विलीन होंगे, लेकिन उनका संघर्ष और विचार हमेशा जीवित रहेगा। झारखंड के जनमानस में उनकी छवि कभी नहीं मिटेगी।
नेमरा से रांची तक आज पूरा झारखंड ‘दिशोम गुरु’ को नम आंखों से विदा कर रहा है।

News Desk

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