अमेरिका: और भारत के बीच बढ़ते ट्रेड टेंशन की एक चौंकाने वाली वजह सामने आई है। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत पर टैरिफ लगाने का बड़ा कारण यह बताया कि उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए भारत ने नॉमिनेट नहीं किया।
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प ने कहा – “पाकिस्तान ने मुझे नॉमिनेट किया, तो भारत भी कर सकता है। अगर नहीं किया, तो क्यों न टैरिफ लगाया जाए।”
भारत पर 50% टैरिफ:
अमेरिका ने भारत पर कुल 50% टैरिफ लगाया है।
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इसमें से 25% अतिरिक्त टैरिफ भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने की वजह से लगाया गया है।
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शेष टैरिफ का कारण ट्रम्प की व्यक्तिगत नाराजगी और व्यापारिक असंतुलन बताया जा रहा है।
मोदी की नाराजगी:
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पूरे मामले से नाराज बताए जा रहे हैं। भारत का मानना है कि अमेरिका ने टैरिफ को कूटनीतिक और व्यापारिक कारणों के बजाय व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से जोड़ा है, जो रिश्तों को कमजोर कर सकता है।
विशेषज्ञों की राय:
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विदेश नीति विश्लेषक मानते हैं कि ट्रम्प की नोबेल ख्वाहिश और भारत पर टैरिफ लगाने का आपसी संबंध भारत-अमेरिका रिश्तों को और जटिल बना सकता है।
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आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, 50% टैरिफ से भारत के निर्यात पर बड़ा असर पड़ेगा और भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार महंगा हो जाएगा।
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रणनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि रूस से तेल खरीद पर अमेरिका की नाराजगी पहले से थी, अब नोबेल विवाद ने रिश्तों में और कड़वाहट बढ़ा दी है।
भारत-अमेरिका रिश्तों पर असर
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब भारत एशिया में अपनी कूटनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है और अमेरिका से साझेदारी दोनों देशों के लिए अहम है। लेकिन इस टैरिफ विवाद ने रिश्तों में नई अनिश्चितता पैदा कर दी है।
निष्कर्ष:
न्यूयॉर्क टाइम्स की यह रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक अनोखा और चौंकाने वाला मोड़ है। नोबेल प्राइज जैसी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा को भारत पर टैरिफ से जोड़ना न सिर्फ ट्रम्प की कूटनीतिक शैली को दर्शाता है, बल्कि भारत-अमेरिका रिश्तों के भविष्य को भी प्रभावित कर सकता है।


