लखनऊ: नगर निगम में सोमवार को प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल हुआ। नगर आयुक्त गौरव कुमार ने एक साथ 20 से अधिक अधिकारियों के तबादले कर दिए। इनमें कई ऐसे अधिकारी भी शामिल हैं जो वर्षों से एक ही पद पर जमे हुए थे और जिन्हें मेयर सुषमा खर्कवाल का करीबी माना जाता था।
गुपचुप तरीके से जारी हुई ट्रांसफर सूची
नगर निगम सूत्रों के अनुसार, तबादलों की भनक किसी को भी पहले से नहीं लगी। सोमवार दोपहर अचानक ट्रांसफर आदेश जारी किए गए और सभी अधिकारियों को लिफाफे के माध्यम से उनके नए कार्यक्षेत्र की जानकारी दी गई। इस खबर के बाद नगर निगम परिसर में हड़कंप मच गया।
सूत्रों के अनुसार, यह नगर निगम में अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई है, जिसमें जोनल अधिकारियों से लेकर कर अधीक्षक और सेनेटरी ऑफिसर तक का स्थानांतरण किया गया है।
मेयर के करीबी अफसर भी बदले गए
ट्रांसफर सूची में मेयर सुषमा खर्कवाल के दो प्रमुख भरोसेमंद अफसरों के नाम भी शामिल हैं।
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मनोज कुमार यादव, जोन 6 के जोनल प्रभारी, को हटाकर जोन 3 में कर अधीक्षक और सेनेटरी ऑफिसर के पद पर भेजा गया।
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अजीत कुमार राय, जोन 8 के अधिकारी, को जोन 7 में भेजा गया है।
इन दोनों को मेयर के करीबी माना जाता था, बावजूद इसके नगर आयुक्त ने इन्हें भी नहीं बख्शा। इसके अलावा जोन-3 में राजेश को, जोन-5 में जीतेंद्र गांधी को और जोन-8 में भी जीतेंद्र गांधी को सेनेटरी ऑफिसर की जिम्मेदारी दी गई है।
कामकाज को लेकर कई बार नोटिस मिले थे
नगर निगम के सूत्रों ने बताया कि टैक्स कलेक्शन, स्वच्छता और अन्य प्रशासनिक कार्यों में लगातार लापरवाही की शिकायतें मिल रही थीं। नगर आयुक्त गौरव कुमार ने पिछले कई महीनों से जोनल अधिकारियों को चेतावनी और नोटिस दिए थे, पर सुधार नहीं हुआ।
लगातार बैठकों में निर्देशों की अवहेलना और शिकायतों के बाद आखिरकार यह सख्त कदम उठाया गया।
इतिहास में पहली बार इतने बड़े स्तर पर तबादले
नगर निगम के एक वरिष्ठ कर्मचारी नेता ने बताया कि इतने बड़े पैमाने पर पीसीएस और जोनल स्तर के अधिकारियों के ट्रांसफर पहली बार हुए हैं। इससे पहले कभी इतनी संख्या में एक साथ तबादले नहीं किए गए।
सूत्रों का कहना है कि यह कदम न केवल नगर निगम की कार्यप्रणाली को दुरुस्त करने के लिए उठाया गया है, बल्कि यह एक प्रशासनिक संदेश भी है कि लापरवाही या पक्षपात अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
नई तैनातियों ने संभाला कार्यभार
ट्रांसफर आदेश जारी होने के तुरंत बाद अधिकांश अधिकारियों ने अपने नए कार्यभार ग्रहण करना शुरू कर दिया। कुछ अफसरों ने हालांकि पैरवी के लिए अपने राजनीतिक संपर्कों को सक्रिय किया, लेकिन तबादला आदेश वापस नहीं लिए गए।


