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लखनऊ में मेयर–नगर आयुक्त विवाद योगी तक पहुंचा: दो साल में पहली बार मेयर सुषमा खर्कवाल नगर निगम मुख्यालय में लगाएंगी जनता दरबार

नगर निगम की बैठक में अधिकारों को लेकर मेयर सुषमा खर्कवाल और नगर आयुक्त गौरव कुमार के बीच बढ़ी तल्खी; अब मामला विधायकों के फीडबैक के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचा।

लखनऊ: नगर निगम में मेयर सुषमा खर्कवाल और नगर आयुक्त गौरव कुमार के बीच अधिकारों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। कार्यकारिणी बैठक में दोनों के बीच तीखी नोकझोंक के बाद अब मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंच गया है।

इस विवाद के बाद मेयर ने अपने कार्यकाल में पहली बार लालबाग स्थित नगर निगम मुख्यालय में जनता दरबार लगाने का निर्णय लिया है।
सूत्रों के अनुसार, मेयर का यह कदम सीधे तौर पर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर असंतोष का संकेत माना जा रहा है।


विवाद से बढ़ी नगर निगम में हलचल

बैठक में अधिकारों के बंटवारे और निर्णय प्रक्रिया को लेकर मतभेद सामने आए।
मेयर और नगर आयुक्त दोनों के बीच अब बातचीत सीमित हो गई है, जबकि निगम के अधिकारी और कर्मचारी तटस्थ रवैया अपनाने की कोशिश में हैं ताकि किसी विवाद में न फंसें।

अब यह विवाद लखनऊ के राजनीतिक गलियारों से लेकर ब्यूरोक्रेसी तक में चर्चा का विषय बना हुआ है।


🧾 विधायकों ने CM योगी को दिया फीडबैक

सूत्रों के अनुसार, लखनऊ उत्तर के विधायक डॉ. नीरज बोरा, बक्शी का तालाब के विधायक योगेश शुक्ला, और सरोजिनी नगर के विधायक राजेश्वर सिंह ने नगर निगम से जुड़ी शिकायतें मुख्यमंत्री तक पहुंचाई हैं।
उन्होंने निगम की कार्यप्रणाली और जनसुविधाओं के प्रभावित होने की जानकारी दी है।

सीएम योगी से विधायकों की इन मुलाकातों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।


📍 अलग-अलग निरीक्षण से दिखा मतभेद

रविवार को छठ घाटों के निरीक्षण के दौरान मेयर और नगर आयुक्त अलग-अलग पहुंचे।
नगर आयुक्त गौरव कुमार सुबह अधिकारियों के साथ निरीक्षण करने निकले, जबकि कुछ घंटे बाद मेयर सुषमा खर्कवाल ने खुद घाटों का निरीक्षण किया।

दोनों के बीच न तो कोई समन्वय रहा और न ही कोई औपचारिक मुलाकात — जिससे यह स्पष्ट हुआ कि तनाव अब सतह पर आ चुका है।


📜 पहले भी टकराव के कई उदाहरण

यह पहली बार नहीं है जब मेयर और नगर आयुक्त आमने-सामने आए हों।
पहले भी सेवानिवृत्त कर्मचारियों से जुड़े एक कार्यक्रम में नहीं बुलाए जाने पर मेयर सुषमा खर्कवाल नाराज हुई थीं।
उन्होंने नगर आयुक्त को पत्र लिखकर प्रोटोकॉल उल्लंघन और कार्यक्रम से अनुपस्थित रहने पर नाराजगी जताई थी।

इसके अलावा झूलेलाल पार्क में मेला आयोजन के लिए भूमि किराए में देरी को लेकर भी दोनों के बीच विवाद हुआ था।
मेयर ने तब कहा था कि देरी से नगर निगम को लगभग 3.5 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।


🏛️ पूर्व नगर आयुक्त से भी रही तनातनी

मेयर का पूर्व नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह से भी टकराव चर्चा में रहा था।
उस समय भी मामला मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचा था।
हालांकि, इंद्रजीत सिंह ने स्थिति को संभाल लिया था और प्रशासनिक संतुलन बनाए रखा था।

वर्तमान नगर आयुक्त गौरव कुमार भी अब नियम-कानून के अनुसार काम करने की नीति पर चल रहे हैं, जबकि मेयर जनता की अपेक्षाओं और जिम्मेदारियों को प्राथमिकता दे रही हैं।


⚖️ असर: निगम का कामकाज प्रभावित

नगर निगम के भीतर अब यह चर्चा आम है कि मेयर और नगर आयुक्त के बीच बढ़ती तल्खी का असर निगम की योजनाओं और सार्वजनिक कार्यों पर साफ दिख रहा है।
अधिकारियों में निर्णय लेने को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है।

निगम के कुछ कर्मचारी मानते हैं कि यह विवाद यदि जल्द नहीं सुलझा, तो नगर विकास कार्यों की गति पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

News Desk

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