काठमांडू। नेपाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ और सोशल मीडिया प्रतिबंध के विरोध में चल रहे हिंसक प्रदर्शन का आज तीसरा दिन है। इस आंदोलन में हालात और भी तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। विशेष रूप से पूर्व प्रधानमंत्री पुष्पकमल दाहाल (प्रचंड) की बेटी के घर से एक शव बरामद होने की खबरे सामने आई हैं, जिससे राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मच गई है।
⚡️ सेना का नियंत्रण
नेपाल में लगातार बिगड़ती स्थिति को रोकने के लिए सेना ने मंगलवार रात 10 बजे से पूरे देश का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। इसके बाद भी कई क्षेत्रों में हिंसा जारी है। कई स्थानों पर प्रदर्शनकारी पुलिस और सेना से भिड़ रहे हैं।
⚠️ सुप्रीम कोर्ट की फाइलें खाक
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, काठमांडू स्थित नेपाल सुप्रीम कोर्ट में करीब 25,000 महत्वपूर्ण फाइलें आग के हवाले हो गई हैं। यह घटना प्रदर्शनकारियों की हिंसा का हिस्सा मानी जा रही है। सुप्रीम कोर्ट प्रशासन का कहना है कि फाइलें अत्यंत संवेदनशील थीं, जिनमें सार्वजनिक हित से जुड़ी अनेक महत्वपूर्ण याचिकाएं शामिल थीं।
👮 उपद्रवी गिरफ्तार
अब तक कुल 27 उपद्रवी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इनमें मुख्य रूप से वे लोग शामिल हैं जो हिंसा को बढ़ावा देने में सक्रिय रहे। प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई करते हुए इन पर भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
🌐 सोशल मीडिया प्रतिबंध और जन आक्रोश
नेपाल सरकार द्वारा सोशल मीडिया पर बैन लगाए जाने से लोगों में भारी आक्रोश है। युवाओं ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रहार बताया है। वहीं, भ्रष्टाचार के खिलाफ भी प्रदर्शनकारियों का गुस्सा भड़कता जा रहा है। सरकार के खिलाफ नारे लगाए जा रहे हैं और प्रधानमंत्री का इस्तीफा मांगा जा रहा है।
🔮 राजनीतिक भविष्य पर असर
विशेषज्ञ मानते हैं कि नेपाल की यह वर्तमान राजनीतिक उथल-पुथल देश के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए खतरा बनती जा रही है। विपक्षी दलों ने इस हिंसा की निंदा करते हुए सरकार से संवेदनशीलता से काम लेने की अपील की है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस मुद्दे को गंभीरता से देखा जा रहा है।
🗨️ अधिकारी प्रतिक्रिया
नेपाल के गृह मंत्रालय ने साफ तौर पर कहा है,
“देश की शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठाया जा रहा है। हम सभी संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा बढ़ा चुके हैं और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
जनता के बीच यह सवाल उठ रहा है कि सरकार के कठोर कदम और सैन्य हस्तक्षेप के बावजूद यह हिंसा कब समाप्त होगी। आने वाले दिनों में हालात पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।


