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कहां गायब हुआ बांके बिहारी मंदिर का 1000 करोड़ का खजाना? सेवादारों-संत समाज में नाराजगी, पुरोहित बोले— सरकार का लक्ष्य ‘ठाकुरजी का धन’

54 साल बाद खजाना खुला, पर मिला सिर्फ कुछ मामूली सामान; गोस्वामियों पर सवाल, पुरोहितों का दावा— ‘अंग्रेजों के समय लूट चुके थे धन’

मथुरा: के वृंदावन स्थित प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर का 54 वर्षों से बंद पड़ा तोशखाना (तहखाना) जब 18 अक्टूबर को खुला, तो पूरे देश की नजरें इस खजाने पर थीं। उम्मीद थी कि यहां से करोड़ों—शायद हजारों करोड़—का खजाना मिलेगा।

लेकिन अंदर मिला क्या?
— सिर्फ 2 तांबे के सिक्के,
3 चांदी के डंडे,
— और एक गुलाल लगी सोने की छोटी छड़

दीवारों पर सीलन, कीचड़, धूल—और बस खाली बॉक्स।

यही कारण है कि अब सवाल उठ रहा है—
क्या सच में बांके बिहारी का 1000 करोड़ का खजाना गायब है?
और यदि हां, तो कहां गया? किसने लिया?


UP सरकार पर गोस्वामियों की नाराजगी— ‘ठाकुर जी के धन पर नजर’

मंदिर के मुख्य सेवायत ज्ञानेंद्र किशोर गोस्वामी का आरोप बेहद सीधा और कड़ा है—

“सरकार की नजर ठाकुर जी के धन पर है। तहखाने में पहले से कुछ नहीं था, अब क्या मिलेगा? अंग्रेजों के समय खजाना लूट लिया गया था। सरकार मंदिर पर कब्जा करना चाहती है।’’

वे कहते हैं कि यह मंदिर उनके पूर्वजों, घर की महिलाओं और गोस्वामी समुदाय की सेवा, त्याग और ईंट–पत्थर ढोकर बनाया गया है।
उनका आरोप है कि—
सरकार मंदिर की व्यवस्थाओं को अपने नियंत्रण में लेना चाहती है, और इसके लिए खजाने को बहाना बनाया गया है।


तोशखाना क्यों खुलवाया गया?

सुप्रीम कोर्ट की हाई पावर कमेटी ने 29 सितंबर 2024 को आदेश जारी किए।
DM मथुरा ने 12 अक्टूबर को नोटिस देकर कार्रवाई शुरू की।

18 अक्टूबर को तहखाना खोला गया।
— ताले की चाबी किसी के पास नहीं थी
— ग्राइंडर से गेट काटना पड़ा
— अंदर कीचड़, अंधेरा, धूल
— सांपों का खतरा टालने को स्नेक कैचर टीम

दो दिनों की जांच में सिर्फ मामूली वस्तुएं मिलीं।


गोस्वामी समुदाय— “पहले से पता था, कुछ नहीं मिलेगा”

पुरोहितों का कहना है कि—

  • मंदिर की दान की हुई चीजें अब SBI खाते के माध्यम से सुरक्षित रखी जाती हैं

  • खजाना अंग्रेजों के समय दो बार लुटेरों द्वारा ऊंटों पर लादकर ले जाया गया

  • जो बचा, उससे ठाकुर जी का ऐतिहासिक झूला (हिंडोला) बनवाया गया

  • तोशखाना एक परंपरा के रूप में रखा गया था, न कि ‘असीमित सोने-चांदी’ के भंडार के लिए

उनका दावा है कि गोस्वामियों ने कभी खजाने में हेराफेरी नहीं की।


स्थानीय लोग— “सवाल उठते हैं, कुछ तो गायब है”

वृंदावन के कई दुकानदारों और भक्तों का कहना है कि—

  • गोस्वामियों के पास मंदिर की हर चीज का ज्ञान है

  • आधे से ज्यादा बक्से खाली मिलना संदेह पैदा करता है

  • भक्तों द्वारा दान किए गए अनमोल आभूषण आखिर गए कहां?

कुछ लोग तो यह भी कहते हैं कि—
“कहीं भगवान ने चमत्कार में सब छिपा तो नहीं लिया?”


1000 करोड़ की संपत्ति गायब होने का बड़ा आरोप

श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले के पक्षकार दिनेश फलाहारी महाराज सीधे आरोप लगाते हैं—

“बांके बिहारी मंदिर में भक्तों, राजघरानों और विदेशों से भी करोड़ों का दान आया। पाकिस्तान से मिली जमीनें भी दर्ज हैं।
लेकिन तोशखाना खाली मिला—CBI जांच होनी चाहिए।”

उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर CBI जांच की मांग की है।


प्रोफेसर का दावा— हरिदास जी का इतिहास पाकिस्तान से जुड़ा

वृंदावन शोध संस्थान के प्रो. राजेश शर्मा बताते हैं कि—

  • बांके बिहारी की पूजा परंपरा बहुत पुरानी है

  • हरिदास जी महाराज के पूर्वज मुल्तान (अब पाकिस्तान) से आए थे

  • इसलिए मंदिर को विदेशी दान और जमीनें भी मिलती थीं

यह इतिहास खजाने की रहस्यमयता को और गहरा कर देता है।


प्रशासन की सफाई— “सुरक्षा बढ़ाई गई, पारदर्शिता लाई जाएगी”

DM मथुरा चंद्र प्रकाश सिंह ने कहा—

  • तोशखाना की जांच SC के आदेश पर की गई

  • मंदिर की निजी बैंक जमा राशि को अब सरकारी बैंकों में रखा जाएगा

  • दान की लाइव स्ट्रीमिंग की व्यवस्था होगी

  • IIT रुड़की की टीम नई सुरक्षा और दर्शन प्रणाली डिजाइन कर रही है

News Desk

Written by News Desk

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