रामपुर। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को दो पैन कार्ड मामले में रामपुर की एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सात-सात वर्ष की सजा और 50-50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। आदेश के बाद दोनों को कड़ी सुरक्षा के बीच रामपुर जिला जेल भेज दिया गया। रिहाई के 55 दिन बाद आजम खां फिर से सलाखों के पीछे पहुंच गए।
55 दिन की रिहाई खत्म, दोबारा जेल पहुंचे आजम और अब्दुल्ला
अब्दुल्ला आजम 25 फरवरी 2024 को हरदोई जेल से छूटे थे जबकि आजम खां 23 सितंबर 2024 को सीतापुर जेल से रिहा हुए थे। दोनों अपनी-अपनी कानूनी लड़ाई में बाहर थे, लेकिन दो पैन कार्ड और आयु विवाद से जुड़े गंभीर मामले में सजा सुनाए जाने के बाद एक बार फिर जेल भेजे गए।
जेल प्रशासन के अनुसार, आजम और अब्दुल्ला को अब बैरक नंबर-1 में रखा गया है, जहां लंबी सजा पाने वाले कैदियों को रखा जाता है। बैरक सीसीटीवी कैमरों से लैस है।
आजम खां और उनके राजनीतिक सफर पर एक नजर
आजम खां उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े मुस्लिम नेताओं में एक माने जाते हैं।
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वे 10 बार रामपुर से विधायक रह चुके हैं।
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4 बार कैबिनेट मंत्री रहे।
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वर्ष 2019 में रामपुर से सांसद चुने गए।
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उनकी पत्नी तज़ीन फात्मा भी विधायक और राज्यसभा सदस्य रही हैं।
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बेटे अब्दुल्ला आजम 2017 में पहली बार विधायक बने थे लेकिन आयु विवाद के चलते हाईकोर्ट ने उनकी विधायकी रद्द कर दी। 2022 में वह फिर से स्वार सीट से विधायक बने।
अब्दुल्ला आजम का जन्मतिथि विवाद—आखिर मामला क्या था?
अब्दुल्ला आजम के शैक्षिक दस्तावेज़ों के अनुसार उनकी जन्मतिथि 1 जनवरी 1993 है।
लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने अपनी जन्मतिथि 30 सितंबर 1990 बताई, ताकि वे चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु सीमा को पूरा कर सकें।
इस पर बसपा प्रत्याशी नवाब काजिम अली खां ने उनके निर्वाचन को हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने उनकी विधायकी निरस्त कर दी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी इसके खिलाफ अब्दुल्ला की अपील खारिज कर दी।
दो पैन कार्ड और फर्जी डेटा का आरोप — मामला कैसे शुरू हुआ?
2019 में सत्ता परिवर्तन के बाद वर्तमान भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने दो जन्म प्रमाणपत्र और दो पैन कार्ड मामले में शिकायत दर्ज कराई थी।
16 दिसंबर 2019 को सिविल लाइंस कोतवाली में दर्ज एफआईआर में कहा गया—
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आयकर विभाग ने अब्दुल्ला को जो पैन कार्ड (DFOPK6164K) जारी किया, उसमें उनकी DOB 1 जनवरी 1993 दर्ज है।
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इसी पैन कार्ड से उनका बैंक खाता चलता है और इसी से उन्होंने अपने सभी आयकर रिटर्न भरे।
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लेकिन नामांकन के समय उन्होंने दूसरी जन्मतिथि का उपयोग किया, जो कानूनी रूप से गलत है।
जांच और सुनवाई के बाद कोर्ट ने माना कि यह दस्तावेज़ों की फर्जीबड़ी और धोखाधड़ी का स्पष्ट मामला है।
रामपुर जेल में बैरक नंबर-1 बना नया ठिकाना
जेलर सुनील सिंह ने बताया कि आजम और अब्दुल्ला को बैरक नंबर-1 में रखा गया है, जहां
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लंबी सजा पाने वाले अपराधियों को रखा जाता है
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बैरक हाई-सिक्योरिटी है
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लगातार निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगे हैं
जेल प्रशासन ने उनकी सुरक्षा को लेकर विशेष व्यवस्था की है।


