नई दिल्ली। संसद में ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर एक ऐतिहासिक बहस की शुरुआत हो चुकी है। इस महत्वपूर्ण चर्चा की शुरुआत लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। उन्होंने ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्षों के ऐतिहासिक सफर पर प्रकाश डालते हुए आपातकाल और आज़ादी के आंदोलन के दौर की कई घटनाओं का उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि वंदे मातरम को महात्मा गांधी राष्ट्रगान के रूप में देखते थे, लेकिन बाद के वर्षों में इसे विवादों में घसीटा गया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर वह कौन सी शक्तियां थीं, जिनकी वजह से इस पवित्र भावना को कमज़ोर करने की कोशिश की गई। उन्होंने मुस्लिम लीग और उस समय के राजनीतिक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए जवाहरलाल नेहरू से जुड़ी चर्चाओं का भी जिक्र किया।
बहस के दौरान शिवसेना सांसद श्रीरंग आप्पा वारणे द्वारा लगाए गए नारे के बाद सदन में कुछ देर के लिए हंगामे जैसे हालात भी बने। इसी दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम’ अब भारत की आत्मा का हिस्सा बन चुका है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के भाषण की सराहना करते हुए यह भी कहा कि तथ्यों के मामले में कई बार कमजोरियां नजर आती हैं।
इसके बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि जैसे एक मां अपने बच्चों में भेदभाव नहीं करती, वैसे ही ‘जन गण मन’ और ‘वंदे मातरम’ मां भारती के दो सपूत हैं। उन्होंने कहा कि ये दोनों गीत न केवल राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति के प्रतीक हैं, बल्कि उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देशवासियों को एकजुट करने का भी काम किया है।
विपक्ष की ओर से लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के उपाय गौरव गोगोई ने कांग्रेस का पक्ष रखते हुए कहा कि प्रधानमंत्री बार-बार नेहरू और कांग्रेस पर आरोप लगाते हैं, लेकिन कोई ठोस दाग लगाने में सफल नहीं हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वंदे मातरम की आलोचना सिर्फ कांग्रेस ने नहीं, बल्कि हिंदू महासभा जैसी संगठनों ने भी की थी।
यह बहस कुल 10 घंटे तक चलने के लिए निर्धारित है। लोकसभा में चर्चा के बाद मंगलवार को राज्यसभा में भी ‘वंदे मातरम’ पर चर्चा होगी। राज्यसभा में गृह मंत्री अमित शाह चर्चा की शुरुआत करेंगे, जबकि स्वास्थ्य मंत्री और सदन में नेता जेपी नड्डा दूसरे प्रमुख वक्ता होंगे।
यह बहस राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ से जुड़े कई ऐतिहासिक पहलुओं, तथ्यों और राष्ट्रीय भावनाओं को सामने लाने का एक महत्वपूर्ण मंच बन रही है।
संसद में ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ पर चल रही बहस केवल एक राजनीतिक चर्चा नहीं, बल्कि भारत की राष्ट्रीय चेतना, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को समझने का अवसर है। जन गण मन और वंदे मातरम को लेकर व्यक्त किए गए विचार यह दर्शाते हैं कि ये दोनों ही गीत भारत की आत्मा और एकता के प्रतीक हैं।


