नई दिल्ली। इंडिगो की फ्लाइट कैंसिल और बढ़े हवाई किराए को लेकर शुक्रवार को सिविल एविएशन मंत्री राम मोहन नायडू ने लोकसभा में चर्चा की। उन्होंने कहा कि सरकार पूरे साल हवाई किराए को नियंत्रित नहीं कर सकती, क्योंकि मार्केट की डिमांड और सप्लाई ही टिकट की अंतिम कीमत तय करती है।
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उन्होंने बताया कि त्योहारों के दौरान एयरफेयर बढ़ना सामान्य है।
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हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इंडिगो और कोविड महामारी जैसे संकट के समय सरकार ने एयरफेयर पर लिमिट लगाई थी।
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इसके अलावा, डि-रेगुलेशन के बाद एयरलाइंस की संख्या बढ़ी और प्रतियोगिता आने से यात्रियों को फायदा हुआ।
इंडिगो फ्लाइट कैंसिल की स्थिति
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बेंगलुरु एयरपोर्ट से शुक्रवार को 54 इंडिगो फ्लाइट्स कैंसिल हुईं।
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इसमें 31 अराइवल और 23 डिपार्चर फ्लाइट्स शामिल हैं।
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इससे पहले गुरुवार को दिल्ली और बेंगलुरु एयरपोर्ट पर 200 से ज्यादा उड़ानें रद्द हुई थीं।
DGCA ने की सख्त कार्रवाई
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DGCA ने इंडिगो की फ्लाइट कैंसिल की सुरक्षा और ऑपरेशनल नियमों की गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार 4 फ्लाइट ऑपरेशन इंस्पेक्टर को सस्पेंड कर दिया।
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यह कदम एयरलाइन के संकट और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया।
कैप्टन गोपीनाथ के बयान
देश में कम किराए वाली विमान सेवा शुरू करने वाले कैप्टन गोपीनाथ ने कहा कि इंडिगो संकट ओवरकॉन्फिडेंस और घमंड का परिणाम है।
मुख्य बिंदु:
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फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों के दूसरे फेज की सही प्लानिंग न होने के कारण 2 दिसंबर से संकट शुरू हुआ।
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एयरलाइन के पास पर्याप्त पायलट नहीं थे, जिससे फ्लाइट्स संचालित नहीं हो सकीं।
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एयरलाइन प्रबंधन ने बॉटम लाइन और स्टॉक मार्केट ग्रोथ पर ज्यादा ध्यान दिया, स्टाफ की समस्याओं को नजरअंदाज किया।
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अगर टिकट बेचने से पहले फ्लाइट्स की संख्या नियंत्रित की जाती, तो स्थिति बेहतर रहती।
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DGCA को पूरी तरह स्वतंत्र रेगुलेटर होना चाहिए, जिसमें कोई भाई-भतीजावाद या राजनीतिक प्रभाव न हो।
निष्कर्ष
इंडिगो फ्लाइट कैंसिल और बढ़े हवाई किराए ने यात्रियों में असंतोष बढ़ा दिया है। एविएशन मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार पूरे साल एयरफेयर को नियंत्रित नहीं कर सकती, लेकिन संकट के समय नियम लागू किए जा सकते हैं। DGCA द्वारा फ्लाइट ऑपरेशन इंस्पेक्टरों के सस्पेंड होने से यह संदेश गया कि सुरक्षा और नियमों का पालन अनिवार्य है।


