in ,

देशभर में UGC के नए नियमों पर बवाल: यूपी में सवर्ण युवकों ने कराया मुंडन, बिहार में फांसी की मांग; सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को तैयार

UGC के ‘इक्विटी रेगुलेशंस 2026’ के खिलाफ जनरल कैटेगरी और सवर्ण समाज का देशव्यापी आक्रोश, सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं पर सुनवाई के संकेत दिए

नई दिल्ली/लखनऊ/पटना। देशभर में यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) द्वारा लागू किए गए नए नियमों को लेकर जनरल कैटेगरी के छात्रों और सवर्ण समाज का विरोध तेज होता जा रहा है। यूपी और बिहार समेत कई राज्यों में बुधवार को सड़कों पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया गया। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने भी UGC के नए नियमों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई के लिए सहमति जता दी है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने वकीलों की दलीलों को सुनते हुए कहा,

“हमें पता है कि देश में क्या हो रहा है। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि नियमों में यदि कोई खामियां हैं तो उन्हें दूर किया जाए। हम मामले को सूचीबद्ध करेंगे।”

इस बयान के बाद आंदोलन कर रहे छात्रों और संगठनों को उम्मीद जगी है कि उन्हें न्यायिक राहत मिल सकती है।


UP-बिहार में उग्र प्रदर्शन, मुंडन से लेकर पोस्टर जलाने तक

UGC के नए नियमों के विरोध में उत्तर प्रदेश और बिहार में प्रदर्शन ने उग्र रूप ले लिया।

  • पीलीभीत (UP) में सवर्ण समाज के युवकों ने प्रतीकात्मक विरोध के तौर पर मुंडन कराकर आक्रोश जताया।

  • लखनऊ और देवरिया में प्रदर्शनकारियों की पुलिस से तीखी नोकझोंक हुई।

  • पटना (बिहार) में प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के पोस्टरों पर कालिख पोती और कुछ स्थानों पर पोस्टर जलाए।

  • रायबरेली में कुछ सवर्ण नेताओं को चूड़ियां भेजे जाने का मामला भी सामने आया, जिससे सियासी बयानबाजी तेज हो गई।

प्रदर्शनकारियों के हाथों में “काला कानून वापस लो” जैसे नारे लिखी तख्तियां देखी गईं।


UGC के नए नियमों का विरोध क्यों हो रहा है?

UGC ने 13 जनवरी 2026 को ‘Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026’ को अधिसूचित किया था। इसके तहत:

  • सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में इक्विटी कमेटी बनाना अनिवार्य होगा

  • SC, ST और OBC छात्रों की शिकायतों के लिए विशेष हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग टीमें बनाई जाएंगी

  • संस्थानों पर जातिगत भेदभाव रोकने की सख्त जिम्मेदारी तय की जाएगी

सरकार का कहना है कि यह नियम उच्च शिक्षा में निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए लाए गए हैं।

हालांकि जनरल कैटेगरी के छात्रों और सवर्ण संगठनों का आरोप है कि इन नियमों से उन्हें “स्वाभाविक अपराधी” की तरह देखा जा रहा है, जिससे कैंपस में उनके खिलाफ माहौल बन सकता है।


संसदीय समिति की सिफारिश से जुड़ा है मामला

UGC के इन नियमों की पृष्ठभूमि में संसद की शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी स्थायी समिति की भूमिका अहम रही है।

इस समिति के अध्यक्ष कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह हैं। समिति ने सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में इक्विटी कमेटी के गठन की सिफारिश की थी। समिति में लोकसभा और राज्यसभा के कुल 30 सदस्य शामिल हैं।


रोहित वेमुला और पायल तड़वी केस का असर

UGC के नए नियमों को रोहित वेमुला और डॉ. पायल तड़वी जैसे मामलों से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

  • रोहित वेमुला (हैदराबाद यूनिवर्सिटी) ने 2016 में सुसाइड किया, आरोप लगे कि वे संस्थागत जातिगत भेदभाव के शिकार थे।

  • डॉ. पायल तड़वी (मुंबई) ने 2019 में आत्महत्या की, आरोप था कि आदिवासी होने के कारण उनके साथ भेदभाव हुआ।

इन मामलों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव पर सख्त टिप्पणियां की थीं।

UGC के नए नियमों को लेकर देश दो धड़ों में बंटा नजर आ रहा है। एक तरफ सरकार और समर्थक इसे सामाजिक न्याय की दिशा में कदम बता रहे हैं, तो दूसरी ओर जनरल कैटेगरी और सवर्ण समाज इसे अपने खिलाफ बता रहा है। सुप्रीम कोर्ट की प्रस्तावित सुनवाई अब इस विवाद की दिशा और दशा तय कर सकती है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा शिक्षा से आगे बढ़कर बड़े सामाजिक-राजनीतिक संघर्ष का रूप ले सकता है।

News Desk

Written by News Desk

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

PM की NCC रैली में भावुक श्रद्धांजलि: बोले- ‘अजित दादा ने महाराष्ट्र ही नहीं, पूरे देश के विकास में दिया बड़ा योगदान’

UP चुनाव 2027 की तैयारी में BJP का मास्टरप्लान: नेगेटिव रिपोर्ट आई तो कटेगा टिकट, संघ की राय भी बनेगी आधार