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‘7 जिलों में 64 लाख घुसपैठिये’, असम में कांग्रेस पर जमकर बरसे अमित शाह

धेमाजी में मिसिंग यूथ फेस्टिवल के मंच से गृह मंत्री का बड़ा आरोप, बोले— तीसरी बार बीजेपी सरकार बनी तो घुसपैठियों को चुन-चुनकर बाहर करेंगे

अरुणाचल प्रदेश: सीमा से सटे असम के धेमाजी जिले में आयोजित 10वें मिसिंग यूथ फेस्टिवल के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के 20 साल के शासनकाल में असम के सात जिलों में घुसपैठियों की संख्या बढ़कर 64 लाख तक पहुंच गई, जिससे राज्य की जनसांख्यिकीय संरचना पूरी तरह बदल गई।

अमित शाह ने कहा कि धुबरी, बारपेटा, दरांग, मारिगांव, बोंगाईगांव, नौगांव और गोलपारा ऐसे जिले हैं, जहां कभी घुसपैठियों की संख्या नगण्य थी, लेकिन कांग्रेस सरकार की कथित लापरवाही और संरक्षण के कारण ये जिले आज घुसपैठिये-बहुल बन गए हैं।

घुसपैठ रोकने पर क्या बोले अमित शाह

गृह मंत्री ने मंच से सवाल उठाते हुए कहा कि घुसपैठ रोकने की जिम्मेदारी हथियार उठाकर युवाओं की नहीं है, बल्कि चुनी हुई सरकार की है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की अगुवाई में भाजपा सरकार यह जिम्मेदारी निभा रही है और आगे भी निभाएगी।

उन्होंने कहा कि अगर आगामी चुनाव में तीसरी बार भाजपा की सरकार बनती है, तो न सिर्फ घुसपैठ रोकी जाएगी, बल्कि अवैध घुसपैठियों को चुन-चुनकर असम से बाहर निकालने का काम भी किया जाएगा।

रोजगार और विकास के दावे

अमित शाह ने दावा किया कि पिछले पांच वर्षों में असम सरकार ने बिना किसी सिफारिश के 1 लाख 56 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां दी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जागीरोड में प्रस्तावित सेमीकंडक्टर फैक्ट्री से 27 हजार से ज्यादा युवाओं को रोजगार मिलेगा और दिसंबर 2026 तक ‘मेड इन असम’ चिप पूरी दुनिया तक पहुंचेगी।

मिसिंग समाज पर विशेष जोर

गृह मंत्री ने मिसिंग समाज को ब्रह्मपुत्र घाटी की धड़कन बताते हुए कहा कि यह समाज असम और भारत की सांस्कृतिक आत्मा है। उन्होंने कहा कि मिसिंग संस्कृति भारत की विविधता और एकता का प्रतीक है।

अमित शाह ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसके शासनकाल में जनजातियों और समाजों को अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं की रक्षा के लिए संघर्ष करना पड़ा। वहीं भाजपा सरकार ने उन्हें सम्मान और विकास दोनों देने का काम किया।

कांग्रेस शासन पर ऐतिहासिक हमला

अमित शाह ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का नाम लेते हुए कहा कि उनके 10 साल राज्यसभा सांसद रहने के बावजूद बोगीबील पुल पूरा नहीं हो सका, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह परियोजना चार साल में पूरी कर दी गई।

अमित शाह का यह बयान असम की राजनीति में घुसपैठ और जनसांख्यिकीय बदलाव के मुद्दे को एक बार फिर केंद्र में ले आया है। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले यह बयान भाजपा के लिए बड़ा राजनीतिक हथियार साबित हो सकता है, वहीं कांग्रेस पर दबाव और तीखा होने की संभावना है।

News Desk

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