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थाईलैंड की राजकुमारी के आते ही बदल गया जोधपुर! रातों-रात साफ हुआ घंटाघर, उठे प्रशासन पर सवाल

राजकुमारी सिरीवनावरी के दौरे से पहले चमका शहर, VVIP मूवमेंट में ट्रैफिक बंद; आम दिनों की बदहाली पर लोगों का सवाल

जोधपुर। थाईलैंड की राजकुमारी सिरीवनावरी नरीरत्ना राजकन्या के जोधपुर दौरे ने एक ही दिन में शहर की तस्वीर बदल दी। आम दिनों में अव्यवस्थाओं, अतिक्रमण और जाम से जूझने वाला घंटाघर बाजार अचानक साफ-सुथरा और व्यवस्थित नजर आया। राजकुमारी के आगमन से पहले रातों-रात अतिक्रमण हटाए गए और सड़कों को चकाचक कर दिया गया, जिस पर शहरवासियों ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रविवार को राजकुमारी जोधपुर एयरपोर्ट स्टेशन पहुंचीं, जहां से वे सीधे उम्मेद भवन पैलेस गईं। इसके बाद रात में उन्होंने घंटाघर क्षेत्र और भीतरी शहर की एक हवेली में रात्रिभोज किया। सोमवार को उनका मेहरानगढ़ किला, जसवंत थड़ा सहित अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों के भ्रमण का कार्यक्रम प्रस्तावित है।

VVIP मूवमेंट से पुलिस अलर्ट, ट्रैफिक हुआ प्रभावित

राजकुमारी के दौरे को देखते हुए जोधपुर पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड में रही। शहरभर में भारी सुरक्षा व्यवस्था और यातायात के विशेष इंतजाम किए गए। VVIP मूवमेंट के चलते कई इलाकों में यातायात रोक दिया गया, जिससे आम लोगों को जाम का सामना करना पड़ा।

घंटाघर बाजार रातों-रात बदला, उठे सवाल

राजकुमारी के आगमन से पहले घंटाघर बाजार में वर्षों से चली आ रही ठेलों की भीड़, अतिक्रमण और अव्यवस्थित पार्किंग अचानक गायब नजर आई। बाजार साफ-सुथरा और खुला दिखाई दिया। इस बदलाव ने स्थानीय लोगों को हैरान कर दिया।

शहरवासियों का कहना है कि जब प्रशासन एक दिन में व्यवस्था सुधार सकता है, तो बाकी दिनों में घंटाघर बाजार अतिक्रमण, ट्रैफिक जाम और अव्यवस्था से क्यों जूझता रहता है? लोगों ने सवाल उठाया कि क्या प्रशासन की सक्रियता केवल VVIP दौरों तक ही सीमित है।

पर्यटन नगरी की छवि और प्रशासन की जिम्मेदारी

जोधपुर एक प्रमुख पर्यटन नगरी है, जहां देश-विदेश से सैलानी आते हैं। ऐसे में आम दिनों में भी बाजारों और यातायात की व्यवस्था बेहतर होना जरूरी है। राजकुमारी के दौरे ने प्रशासन की क्षमता तो दिखाई, लेकिन साथ ही रोजमर्रा की लापरवाही को भी उजागर कर दिया।

थाईलैंड की राजकुमारी के जोधपुर दौरे ने शहर की व्यवस्थाओं की सच्चाई सामने ला दी। एक दिन में बदला हुआ घंटाघर बाजार यह सवाल छोड़ गया कि यदि व्यवस्था संभव है, तो वह स्थायी क्यों नहीं? अब देखना होगा कि प्रशासन इस अस्थायी चमक को स्थायी सुधार में बदल पाता है या नहीं।

News Desk

Written by News Desk

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