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अयोध्या में ऐतिहासिक क्षण: राष्ट्रपति ने रामलला के दर्शन कर स्थापित किया श्रीराम यंत्र, गूंजे वैदिक मंत्र

हिंदू नववर्ष: और चैत्र नवरात्रि के शुभ अवसर पर अयोध्या में एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षण देखने को मिला, जब द्रौपदी मुर्मू ने राम मंदिर पहुंचकर रामलला के दर्शन किए और श्रीराम यंत्र की स्थापना कर इस आयोजन को विशेष बना दिया।

वैदिक मंत्रों के बीच हुआ दिव्य अनुष्ठान

राष्ट्रपति ने मंदिर के द्वितीय तल पर बने राम दरबार में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रीराम यंत्र की विधिवत स्थापना की। इस दौरान पूरा वातावरण भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत नजर आया। उन्होंने रामलला की आरती भी उतारी और मंदिर परिसर का अवलोकन किया।

राष्ट्रपति ने इस अवसर पर कहा कि “अयोध्या में प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि पर कदम रखना मेरे लिए सौभाग्य की बात है।” उन्होंने रामराज्य की अवधारणा का उल्लेख करते हुए देश की प्रगति और आध्यात्मिक उन्नति की कामना की।

भव्य स्वागत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

राष्ट्रपति सुबह करीब साढ़े 10 बजे अयोध्या एयरपोर्ट पहुंचीं, जहां योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उनका स्वागत किया।

एयरपोर्ट से मंदिर तक के मार्ग में करीब 20 स्थानों पर भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें 250 से अधिक कलाकारों ने रामायण और भक्ति से जुड़े प्रस्तुतीकरण दिए। यह आयोजन अयोध्या की सांस्कृतिक समृद्धि और आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक बना।

राम यंत्र: आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र

श्रीराम यंत्र को विशेष रूप से कांचीपुरम में तैयार किया गया था। इसके बाद इसे तिरुपति होते हुए रथयात्रा के माध्यम से अयोध्या लाया गया।

करीब 150 किलो वजनी इस यंत्र पर सोने की परत चढ़ाई गई है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह एक वैदिक ज्यामितीय संरचना है, जिसमें भगवान श्रीराम और अन्य देवी-देवताओं की दिव्य ऊर्जा को मंत्रों और आकृतियों के माध्यम से स्थापित किया गया है। इसे अत्यंत शुभ और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।

सीएम योगी का बयान

इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि “दुनिया के कई देशों में उथल-पुथल और युद्ध की स्थिति है, लेकिन भारत में शांति और आध्यात्मिकता का वातावरण है।” उन्होंने इसे नए और बदलते भारत का प्रतीक बताया।

योगी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले आस्था को अंधविश्वास कहा जाता था, लेकिन आज वही आस्था देश की पहचान बन रही है।

सामाजिक समरसता का संदेश

राष्ट्रपति ने रामलला के दर्शन के बाद मंदिर परिसर के विभिन्न हिस्सों का निरीक्षण किया। उन्होंने राम परिवार के दर्शन-पूजन के साथ-साथ सामाजिक समरसता से जुड़े प्रतीकों का भी अवलोकन किया।

यह कार्यक्रम केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का संदेश देने वाला भी माना जा रहा है।

अयोध्या का बढ़ता महत्व

राष्ट्रपति के इस दौरे को राम मंदिर के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में देखा जा रहा है। प्राण-प्रतिष्ठा के बाद यह उनका दूसरा दौरा है, जो अयोध्या की बढ़ती वैश्विक पहचान को दर्शाता है।

अयोध्या अब केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में उभर रही है, जहां देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

News Desk

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