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ईरान का बड़ा बयान: “भारत बना सच्चा दोस्त”, होर्मुज पर US को खुली चेतावनी! राजदूत फथाली ने खोले कई राज

Iran: और United States के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारत में तैनात ईरानी राजदूत Mohammad Fathali का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने इस कठिन समय में India और यहां की जनता का आभार जताते हुए कहा कि भारत एक सच्चा और भरोसेमंद साझेदार साबित हुआ है।

“संकट में भारत ने निभाई दोस्ती”

राजदूत फथाली ने कहा कि जब हालात चुनौतीपूर्ण थे, तब भारत सरकार ने हर स्तर पर सहयोग दिया। उन्होंने बताया कि भारत ने जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित कीं, जिससे स्थिति को संभालने में मदद मिली।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत और ईरान के रिश्ते केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि विश्वास और साझेदारी पर आधारित हैं, जो संकट के समय और मजबूत हो जाते हैं।

भारतीय जहाजों को लेकर बड़ा खुलासा

फथाली ने Strait of Hormuz को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि इस जलडमरूमध्य से गुजरने वाले भारतीय टैंकरों पर ईरान कोई टोल नहीं लगा रहा है।

उनका कहना था कि मौजूदा हालात के बावजूद दोनों देशों के बीच व्यापार और सहयोग सामान्य रूप से जारी है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत और ईरान का साझा हित और भविष्य है, इसलिए दोनों देश हर परिस्थिति में एक-दूसरे के साथ खड़े रहेंगे।

अमेरिका पर वादाखिलाफी का आरोप

राजदूत ने अमेरिका पर तीखा हमला करते हुए कहा कि ईरान ने अमेरिका की पुरानी वादाखिलाफी को न तो भुलाया है और न ही भुला सकता है।

उनके मुताबिक, कूटनीति भी ईरान के लिए संघर्ष का एक हिस्सा है और यह उनके देश की सुरक्षा रणनीति का अहम अंग है।

फथाली ने कहा कि हाल ही में जब बातचीत चल रही थी, उसी दौरान अमेरिका और Israel ने बड़े पैमाने पर हमले शुरू कर दिए, जिससे भरोसे का माहौल कमजोर हुआ।

12 दिन के संघर्ष का जिक्र

ईरानी राजदूत ने हालिया 12 दिनों के संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि इस दौरान ईरान लगातार बातचीत के पक्ष में था, लेकिन दूसरी ओर सैन्य कार्रवाई जारी रही।

उन्होंने आरोप लगाया कि हमलों में स्कूलों और अस्पतालों जैसे संवेदनशील ठिकानों को भी निशाना बनाया गया, जो अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है।

होर्मुज पर सख्त रुख

फथाली ने साफ किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान के अधिकार क्षेत्र में आता है और यह उनके लिए बेहद रणनीतिक और आर्थिक महत्व रखता है।

उन्होंने कहा कि युद्ध शुरू होने से पहले यहां पूरी तरह सामान्य स्थिति थी, लेकिन बाद में हालात बदल गए।

ईरान ने अमेरिकी नाकाबंदी के ऐलान पर कड़ा विरोध जताते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताया।

पाकिस्तान में असफल शांति वार्ता का असर

इस पूरे घटनाक्रम के बीच Pakistan में शांति वार्ता के असफल रहने से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया दोनों में अस्थिरता का खतरा बढ़ सकता है।

वैश्विक चिंता क्यों बढ़ी?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर पड़ सकता है।

इसी कारण ईरान-अमेरिका तनाव को पूरी दुनिया गंभीरता से देख रही है।

News Desk

Written by News Desk

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