नई दिल्ली। लोकसभा में सोमवार को राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद पर एक महत्वपूर्ण चर्चा देखने को मिली जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर 55 मिनट लंबा भाषण देते हुए बताया कि किस प्रकार भारतीय सेनाओं ने आतंकियों को उनके ही घर में घुसकर मार गिराया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि सेना ने हमारी माताओं-बहनों के सिंदूर का बदला लिया और इस कार्रवाई में दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब मिला।
ऑपरेशन सिंदूर: 22 मिनट की रणनीतिक सफलता
रक्षा मंत्री ने कहा,
“ऑपरेशन सिंदूर की लाली शौर्य की कहानी है। यह सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं बल्कि हमारे जज़्बे की पहचान है।”
उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन में 100 से अधिक आतंकी और उनके हैंडलर मारे गए। यह कार्रवाई सिर्फ 22 मिनट में सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत ने पाकिस्तान के साथ किसी भी दबाव में सीजफायर नहीं किया, बल्कि अपने निर्णय और रणनीति के अनुसार आगे बढ़ा।
विरोध पर रक्षा मंत्री का जवाब
राजनाथ सिंह ने विपक्ष के सवालों पर तीखा जवाब देते हुए कहा,
“जब परीक्षा होती है तो उसका नतीजा मायने रखता है। यह नहीं कि कितनी पेंसिल टूटीं या कितने पेन गुम हुए। मकसद था आतंकियों के ठिकाने तबाह करना और सेनाओं ने वह लक्ष्य हासिल कर लिया।”
विपक्ष का हमला: गौरव गोगोई ने उठाए सवाल
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने बहस की शुरुआत करते हुए कहा कि सरकार को लगता है कि चाहे कितनी भी बड़ी गलती हो, कोई सवाल नहीं उठाएगा।
उन्होंने कहा,
“सरकार में घमंड आ गया है। यह सोच खतरनाक है कि जवाबदेही से बचा जा सकता है।”
गोगोई ने यह भी मांग की कि ऑपरेशन से जुड़े तथ्यों और रणनीतियों की पारदर्शिता होनी चाहिए और संसद में इसे लेकर गंभीर चर्चा की जानी चाहिए।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर सरकार और विपक्ष दोनों के बीच तीखी बहस ने संसद के सत्र को गरमा दिया। एक ओर जहां सरकार इस ऑपरेशन को राष्ट्र की सैन्य ताकत और रणनीतिक विजन का प्रतीक मान रही है, वहीं विपक्ष पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहा है।
???? निष्कर्ष:
‘ऑपरेशन सिंदूर’ सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि एक राजनीतिक और भावनात्मक संदेश भी है। जहां एक ओर भारत ने अपनी सीमाओं के बाहर जाकर आतंकियों को करारा जवाब दिया, वहीं संसद में इस पर हो रही बहस लोकतंत्र की ताकत को भी दर्शाती है।


