नई दिल्ली। भारतीय सेना के सम्मान को सर्वोपरि बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पंजाब पुलिस के उन अफसरों पर कड़ी नाराज़गी जताई, जिन पर एक सेवारत सेना कर्नल और उनके बेटे की पिटाई का आरोप है। कोर्ट ने इस घटना को बेहद गंभीर और शर्मनाक बताया, और कहा कि “सेना आपका बचाव करने सीमा पर जाती है और तिरंगे में लिपटकर लौटती है।”
क्या है मामला?
घटना उस समय की है जब एक सेवारत सेना कर्नल और उनके बेटे ने दिल्ली से पटियाला जाते समय एक भोजनालय के बाहर अपनी गाड़ियों को हटाने से मना किया। इस पर पंजाब पुलिस के चार अधिकारियों ने कथित रूप से उन्हें बुरी तरह पीट दिया।
सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि एफआईआर दर्ज करने में आठ दिन की देरी हुई और कोई गिरफ्तारी नहीं की गई।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने कहा:
“आप घर में चैन की नींद सो रहे हैं क्योंकि वह आदमी -40 डिग्री तापमान में आपकी रक्षा कर रहा है। ऐसे सैनिकों का सम्मान कीजिए।”
कोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए कहा कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का आदेश सुविचारित है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि
“हमें इस मामले में भारी जुर्माना लगाना चाहिए, लेकिन फिलहाल हम आदेश में नहीं डाल रहे।”
हाईकोर्ट के आदेश और पुलिस की निष्क्रियता
इस मामले में हाईकोर्ट ने जांच को सीबीआई को सौंपते हुए चार महीने में निष्कर्ष निकालने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद किसी भी आरोपी पुलिस अधिकारी की गिरफ्तारी नहीं हुई, जिसके चलते कोर्ट को कहना पड़ा कि:
“ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह लगे कि जांच निष्पक्ष हो रही है।”
‘अगर छुपाने को कुछ नहीं है, तो स्वतंत्र जांच से क्यों डर?’
सुनवाई के दौरान जस्टिस कुमार ने सवाल उठाया कि
“अगर आपके पास छिपाने को कुछ नहीं है, तो आप स्वतंत्र जांच से क्यों घबरा रहे हैं?”
एफआईआर दर्ज होने के आठ दिन बाद शिकायतकर्ता को मजबूर होकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
सैनिकों का अपमान असहनीय: सुप्रीम कोर्ट
कोर्ट ने अपने कठोर रुख में कहा:
“आप युद्ध के समय पुलिस का महिमामंडन कर रहे हैं, और एक कर्नल की शिकायत पर भी कार्रवाई नहीं कर पा रहे? यह अराजकता स्वीकार्य नहीं है।”
निष्कर्ष: सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट संदेश – सेना को सम्मान दें, कानून को तोड़ने वालों को नहीं
इस फैसले के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय सेना के जवानों का अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पुलिस अफसरों द्वारा सत्ता और पद का दुरुपयोग न केवल कानून के खिलाफ है बल्कि देश की रक्षा करने वाले सशस्त्र बलों के मनोबल पर भी सीधा प्रहार है।


