नई दिल्ली: में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) और अनिल अंबानी से जुड़े विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई 2,000 करोड़ रुपए से अधिक के बैंक फ्रॉड मामले में की गई है। आरोप है कि यस बैंक से लिए गए लोन का पैसा गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया।
CBI ने आरकॉम के दफ्तरों और अनिल अंबानी के व्यक्तिगत ठिकानों में दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच के लिए छापेमारी की।
पिछली कार्रवाई और जांच की पृष्ठभूमि
इससे पहले 23 जुलाई 2025 को भी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप से जुड़े 35 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की थी। उस समय भी वित्तीय धोखाधड़ी और बैंक फ्रॉड के मामले की जांच की जा रही थी।
CBI और ED की लगातार जांच से यह साफ हो रहा है कि रिलायंस कम्युनिकेशंस द्वारा लिए गए लोन का सही उपयोग नहीं किया गया और इसे अन्य व्यापारिक गतिविधियों में लगाया गया।
जांच की दिशा और आगे की कार्रवाई
CBI ने आरकॉम के फाइनेंशियल रिकॉर्ड और बैंक ट्रांजैक्शन की जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, पैसों के इस्तेमाल की पूरी ट्रैकिंग की जाएगी। साथ ही, मामले में शामिल अन्य अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
CBI के सूत्रों के अनुसार, इस मामले में कई गंभीर आरोप सामने आए हैं और आगे की कार्रवाई में बैंक अधिकारियों और रिलायंस कम्युनिकेशंस के वरिष्ठ प्रबंधन को भी नोटिस जारी किया जा सकता है।
विशेषज्ञों की राय
फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का कहना है कि बड़े कॉरपोरेट लोन फ्रॉड मामले में CBI और ED की छापेमारी से यह संदेश जाता है कि कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन करने वालों को नहीं बख्शा जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भविष्य में बड़े कॉरपोरेट्स में वित्तीय अनुशासन को बढ़ावा मिलेगा।


