लखनऊ। यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमिशन (UGC) के नए नियमों के खिलाफ लखनऊ में करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने अर्धनग्न होकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें सरकार ने ‘नंगा कर दिया है’ और जब तक नियम वापस नहीं होंगे, वे बिना कपड़े पहने ही धरना देंगे।
परिवर्तन चौक पर प्रदर्शन
कार्यकर्ता कैसरबाग स्थित स्वास्थ्य भवन चौराहे से रैली निकालकर परिवर्तन चौक पहुंचे। उनके हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर लिखा था:
“UCC लाओ, UGC हटाओ।”
करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने अपने कपड़े फाड़ दिए और नारेबाजी शुरू कर दी। पुलिस ने विधानसभा की ओर कूच करने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की।
“हमने देश को 525 यूनिवर्सिटी दान की और आज सरकार ने हमें नंगा कर दिया। सरकार हमको अपराधी मानती है। जब तक UGC नियम वापस नहीं होंगे, हम इसी तरह रहेंगे।”
— दिनेश चंद्र, करणी सेना कार्यकर्ता
छात्रों का समर्थन
लखनऊ विश्वविद्यालय और शहर के कई कॉलेजों के छात्र भी सड़क पर उतर आए। LU कैंपस के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। छात्रों ने जोरदार नारेबाजी की और “UGC रोल बैक” के नारे लगाए।
- अर्पित तिवारी: “UGC के जरिए जनरल कैटेगरी के छात्रों को सीधे अपराधी घोषित करने का प्रयास किया जा रहा है।”
- शशांक जायसवाल: “यह कानून हमारी दोस्ती और कॉलेज में शांतिपूर्ण माहौल तोड़ने के लिए है।”
UGC नियम और विरोध का कारण
UGC ने 13 जनवरी 2026 को नए नियम नोटिफाई किए—‘Promotion of Equity in Higher Education Institution Regulation, 2026’।
- नियम के तहत SC, ST और OBC छात्रों के लिए विशेष समितियां, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग टीमें बनाई जाएंगी।
- सरकार का कहना है कि यह बदलाव उच्च शिक्षा संस्थानों में निष्पक्षता और जवाबदेही लाने के लिए हैं।
हालांकि, करणी सेना और जनरल कैटेगरी के छात्रों का कहना है कि यह नियम सवर्ण छात्रों को अपराधी बनाने वाला है और कॉलेजों में अराजकता पैदा कर सकता है।
करणी सेना का विरोध और नेताओं की प्रतिक्रिया
- रणविजय सिंह, प्रदेश महासचिव:
“2026 की गाइडलाइन में झूठे आरोप पर जुर्माने का प्रावधान खत्म कर दिया गया। इससे जनरल कैटेगरी असुरक्षित हुई है। हम पीछे नहीं हटेंगे।”
- करणी सेना कार्यकर्ताओं ने स्वास्थ्य भवन से परिवर्तन चौक तक रैली निकाली और काली तख्तियां लेकर नारे लगाए।
लखनऊ में करणी सेना और छात्रों का यह प्रदर्शन UGC 2026 नियमों के खिलाफ जनरल कैटेगरी की गहरी नाराजगी को दर्शाता है। यह आंदोलन न केवल शैक्षिक नीतियों पर विवाद को उजागर करता है, बल्कि सामाजिक और जातीय संवेदनाओं के मुद्दे भी सामने ला रहा है। अब सवाल यह है कि सरकार इस विरोध के बीच नियमों में कोई संशोधन करेगी या नहीं।


