नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के दौरान लगातार हो रहे हंगामे ने सोमवार को नया मोड़ ले लिया। विपक्षी दलों ने संकेत दिए हैं कि वे लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकते हैं। न्यूज एजेंसी IANS ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है।
राहुल गांधी को बोलने देने की मांग पर अड़ा विपक्ष
बजट सत्र के 9वें दिन यानी सोमवार की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने जोरदार हंगामा शुरू कर दिया। विपक्षी सांसदों की मुख्य मांग थी कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी को सदन में बोलने दिया जाए।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने विपक्ष से कहा कि वे प्रश्नकाल के बाद अपनी बात रखें, लेकिन विपक्षी सांसद इस पर सहमत नहीं हुए और नारेबाजी जारी रखी।
स्पीकर ने स्थगित की कार्यवाही
लगातार हंगामे के चलते लोकसभा स्पीकर ने सदन की कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। इससे पहले शुक्रवार को भी भारी हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही तीन बार स्थगित करनी पड़ी थी।
राज्यसभा में भी टकराव के आसार
केवल लोकसभा ही नहीं, बल्कि राज्यसभा में भी हंगामे के आसार बने हुए हैं। शुक्रवार को राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के बीच तीखी बहस देखने को मिली थी।
यह विवाद राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को लेकर हुआ था, जिन्होंने 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था।
‘गद्दार’ बयान से बढ़ा विवाद
इससे पहले संसद परिसर में राहुल गांधी ने रवनीत सिंह बिट्टू को लेकर ‘गद्दार’ शब्द का इस्तेमाल किया था, जिसके बाद राजनीतिक माहौल और ज्यादा गरमा गया। भाजपा ने इस बयान को असंसदीय बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई थी।
सरकार का पलटवार
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि
“कांग्रेस और विपक्षी नेता संसद की कार्यवाही नहीं चलने देना चाहते। लोकतंत्र में चर्चा जरूरी है, लेकिन हंगामा समाधान नहीं है।”
स्पीकर ने U19 टीम को दी बधाई
हंगामे के बीच लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने U19 वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम को बधाई भी दी। उन्होंने कहा कि युवा खिलाड़ियों ने देश का मान बढ़ाया है और पूरे देश को उन पर गर्व है।
बजट सत्र के दौरान विपक्ष और सरकार के बीच टकराव लगातार गहराता जा रहा है। राहुल गांधी को बोलने देने की मांग से शुरू हुआ विवाद अब लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव तक पहुंचता दिख रहा है। अगर विपक्ष इस प्रस्ताव को औपचारिक रूप देता है, तो यह मौजूदा संसद सत्र का सबसे बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम साबित हो सकता है।


