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9 मिनट का अद्भुत ‘सूर्य तिलक’: रामलला के ललाट पर पड़ी दिव्य किरणें, अयोध्या में उमड़ा 10 लाख श्रद्धालुओं का सैलाब

अयोध्या: में रामनवमी 2026 का पर्व इस बार ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टि से विशेष बन गया। शुक्रवार दोपहर ठीक 12 बजे अभिजीत मुहूर्त में रामलला का भव्य ‘सूर्य तिलक’ किया गया। इस दौरान सूर्य की किरणें लगभग 9 मिनट तक भगवान रामलला के ललाट पर पड़ीं, जिसे देखने के लिए लाखों श्रद्धालु और करोड़ों दर्शक उत्साहित रहे।

प्राण-प्रतिष्ठा के बाद यह दूसरा अवसर था जब रामलला का सूर्य तिलक किया गया। इस दिव्य क्षण को देशभर में लाइव प्रसारित किया गया, जिसे प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भी टीवी पर देखा और हाथ जोड़कर श्रद्धा व्यक्त की।

सूर्य तिलक से पहले मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और पंचामृत अभिषेक किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान का अभिषेक दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से किया गया। इसके बाद रामलला को स्वर्ण जड़ित पीतांबर पहनाया गया और सोने का मुकुट, हार एवं आभूषणों से अलंकृत किया गया। गर्भगृह को फूलों और सुगंधित सजावट से विशेष रूप से सजाया गया था।

इस सूर्य तिलक की सबसे खास बात इसकी वैज्ञानिक व्यवस्था रही। मंदिर परिसर में लगभग 65 फीट लंबा विशेष स्ट्रक्चर तैयार किया गया, जिसमें अष्टधातु के 20 पाइप, 4 लेंस और 4 दर्पण (मिरर) लगाए गए थे। इनकी मदद से सूर्य की किरणों को सीधे गर्भगृह तक पहुंचाया गया और ठीक निर्धारित समय पर भगवान के ललाट पर केंद्रित किया गया। यह तकनीक परंपरा और विज्ञान का अद्भुत संगम मानी जा रही है।

सूर्य तिलक के दौरान गर्भगृह में 14 पुजारी उपस्थित रहे, जिन्होंने पूरे विधि-विधान से पूजा संपन्न कराई। जैसे ही सूर्य की किरणें भगवान के मस्तक पर पड़ीं, मंदिर परिसर ‘जय श्रीराम’ के जयघोष से गूंज उठा। इस दौरान कुछ समय के लिए मंदिर के पट भी बंद किए गए, ताकि पूजा विधि में कोई व्यवधान न आए।

रामनवमी के इस पावन अवसर पर अयोध्या में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। राम जन्मभूमि ट्रस्ट के अनुसार, करीब 10 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे। राम पथ, भक्ति पथ और जन्मभूमि पथ पर लंबी कतारें देखने को मिलीं। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने विशेष व्यवस्था की थी।

श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस बार दर्शन का समय भी बढ़ाया गया। आम दिनों में जहां सुबह 6:30 बजे से रात 9:30 बजे तक दर्शन होते हैं, वहीं रामनवमी पर सुबह 5 बजे से रात 11 बजे तक यानी कुल 18 घंटे दर्शन की व्यवस्था की गई।

पूरे अयोध्या में उत्सव का माहौल देखने को मिला। शहर के लगभग 10 हजार मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और कार्यक्रम आयोजित किए गए। हर ओर भजन-कीर्तन, धार्मिक झांकियां और भक्ति का माहौल नजर आया।

सूर्य तिलक के बाद भगवान रामलला को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग भी लगाया गया, जिसे ‘छप्पन भोग’ कहा जाता है। श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर अपने जीवन को धन्य माना।

धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि सूर्य तिलक केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि आस्था और विज्ञान का अद्भुत मेल है। यह आयोजन दर्शाता है कि भारतीय संस्कृति में धार्मिक अनुष्ठानों को भी वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जोड़ा जा सकता है।

रामलला का सूर्य तिलक न केवल एक धार्मिक आयोजन था, बल्कि यह आस्था, विज्ञान और संस्कृति का संगम भी बना। अयोध्या में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ और दिव्य वातावरण ने इस दिन को ऐतिहासिक बना दिया। यह आयोजन आने वाले वर्षों में भी श्रद्धा और तकनीक के मेल का प्रतीक बना रहेगा।

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