नई दिल्ली। भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम को आज नई ऊंचाई मिलने जा रही है। आज तेजस मार्क-1ए (Tejas Mark-1A) की पहली उड़ान होगी, जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मौजूद रहेंगे। यह स्वदेशी रूप से निर्मित एलसीए तेजस (LCA Tejas) का आधुनिक संस्करण है, जो तकनीक और क्षमता दोनों में कहीं अधिक उन्नत है।
तेजस मार्क-1ए का निर्माण हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने किया है। इस विमान के 65% से अधिक उपकरण भारत में ही बने हैं, जो आत्मनिर्भर भारत अभियान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
तेजस मार्क-1A: स्वदेशी तकनीक की उड़ान
तेजस मार्क-1ए एक चौथी पीढ़ी का हल्का और ताकतवर लड़ाकू विमान है। यह 2200 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से उड़ान भर सकता है और 9 टन तक हथियारों का भार उठा सकता है।
यह विमान बियॉन्ड विजुअल रेंज मिसाइल, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट, और एयर-टू-एयर व एयर-टू-ग्राउंड दोनों हमलों की क्षमता से लैस है। यह एक साथ कई लक्ष्यों को साधने की ताकत रखता है।
देरी के पीछे की वजह – इंजन सप्लाई में बाधा
शुरुआती योजना के अनुसार वायुसेना को यह विमान दो साल पहले मिल जाना चाहिए था। लेकिन अमेरिकी इंजन की देर से आपूर्ति के कारण इसमें देरी हुई।
अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (GE) से भारत ने 99 इंजनों की आपूर्ति के लिए 5,375 करोड़ रुपये का सौदा किया था। हाल ही में HAL को इस अनुबंध के तहत चौथा इंजन मिला है।
HAL ने बताया कि 10 तेजस मार्क-1A विमान पहले ही तैयार हैं। इंजन मिलते ही इन पर फिटिंग और ट्रायल पूरे कर वायुसेना को सौंप दिया जाएगा।
एचएएल की योजना है कि 2026 से हर साल 30 तेजस मार्क-1A विमानों का निर्माण किया जाएगा।
वायुसेना के लिए क्यों जरूरी है तेजस
वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास केवल 29 स्क्वॉड्रन लड़ाकू विमानों के हैं, जबकि उसे चीन और पाकिस्तान की संयुक्त चुनौती से निपटने के लिए 42 स्क्वॉड्रन की जरूरत है।
मिग-21 के रिटायर होने के बाद यह कमी और बढ़ गई है। इसलिए तेजस मार्क-1A जैसे स्वदेशी विमानों का उत्पादन और तैनाती बेहद जरूरी हो गई है।
वायुसेना पहले ही कह चुकी है कि
“भारत को रणनीतिक स्वायत्तता पाने के लिए स्वदेशी रक्षा तकनीकों में लंबी छलांग लगानी होगी।”
कितना घातक है तेजस मार्क-1A
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अधिकतम गति: 2200 किमी/घंटा (Mach 1.8)
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हथियार क्षमता: 9 टन तक भार
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तकनीक: बियॉन्ड विजुअल रेंज मिसाइल और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट
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निर्माण: 65% से अधिक स्वदेशी उपकरण
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रेंज: 1000 किमी से अधिक
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योजना: बीकानेर के नाल एयरबेस पर तैनाती — पाकिस्तान सीमा के पास सामरिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान।
भविष्य की योजना और रक्षा मजबूती
रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में HAL के साथ 97 अतिरिक्त तेजस लड़ाकू विमानों के लिए 62,370 करोड़ रुपये का अनुबंध किया है। इसमें वायुसेना को 68 सिंगल-सीटर और 29 ट्विन-सीटर विमान मिलेंगे।
इन विमानों की आपूर्ति 2027-28 से शुरू होकर अगले छह वर्षों में पूरी की जाएगी।
यह कदम भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और स्वदेशी उत्पादन क्षमता को नई ऊंचाई देने वाला है।


