लखनऊ: में शुक्रवार को किसानों ने कमिश्नर ऑफिस का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया।
भारतीय किसान यूनियन (अवध गुट) के बैनर तले बड़ी संख्या में किसान डंडा और झंडा लेकर पहुंचे और मुख्य गेट बंद कर कमिश्नर की गाड़ी रोक दी। इस दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया। प्रदर्शन में महिला किसानों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
कमिश्नर की गाड़ी को नहीं मिला रास्ता
प्रदर्शन के दौरान जब कमिश्नर की गाड़ी ऑफिस से बाहर निकलने लगी, किसानों ने उसे बीच रास्ते में रोक दिया। करीब 15 मिनट तक गाड़ी गेट के पास फंसी रही, लेकिन किसानों ने रास्ता नहीं दिया। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, मगर प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे। आखिरकार कई घंटे बाद कमिश्नर की गाड़ी को दूसरे रास्ते से ऑफिस से निकाला गया।
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने कमिश्नर ऑफिस के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया और “किसान विरोधी सरकार मुर्दाबाद” के नारे लगाए।
महिला किसानों का दर्द: ‘खेती छिन गई, अब जूठा धोने को मजबूर’
प्रदर्शन में शामिल महिला किसानों ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा,
“हम खेतों की मालकिन थीं, अब घरों में दूसरों का जूठा धोने को मजबूर हैं। भीख मांगने की नौबत आ गई है।”
महिलाओं ने भी डंडा लेकर प्रदर्शन किया और कहा कि अब मुआवजा दिए बिना पीछे नहीं हटेंगी।
40 साल पुराना विवाद बना गुस्से की जड़
भारतीय किसान यूनियन (अवध गुट) के महामंत्री राम वर्मा ने बताया कि 1980 से 1985 के बीच LDA (लखनऊ विकास प्राधिकरण) ने कानपुर रोड पर 23 गांवों की जमीन अधिग्रहित की थी। उस वक्त किसानों से कहा गया था कि उन्हें मुआवजा और दुकानों के लिए चबूतरा आवंटन दिया जाएगा।
लेकिन अब तक न तो किसी को वाजिब मुआवजा मिला और न ही दुकानों के लिए चबूतरे। किसान नेताओं का कहना है कि सरकार लगातार किसानों को गुमराह कर रही है।
किसानों की मांगें
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अधिग्रहित जमीनों का उचित मुआवजा दिया जाए।
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प्रभावित परिवारों को दुकानों के लिए चबूतरे आवंटित किए जाएं।
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भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसानों को रोजगार और पुनर्वास का प्रावधान हो।
प्रशासन सतर्क, पुलिस बल तैनात
प्रदर्शन के दौरान कमिश्नर ऑफिस के बाहर भारी पुलिस बल तैनात रहा। कुछ देर तक अफरा-तफरी का माहौल भी बना, लेकिन बाद में स्थिति नियंत्रण में आ गई। प्रशासन ने किसानों से वार्ता कर शांति बनाए रखने की अपील की।


