नई दिल्ली: अगर आप बाइक या स्कूटर चलाते हैं तो हेडलाइट से जुड़ा यह प्रस्ताव आपके लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने के उद्देश्य से केंद्रीय मोटर वाहन नियमों यानी CMVR में संशोधन का प्रस्ताव रखा है।
प्रस्तावित बदलाव खास तौर पर नए दोपहिया वाहनों में इस्तेमाल होने वाली ऑटोमैटिक हेडलैंप ऑन (AHO) प्रणाली और हेडलैंप की अधिकतम प्रकाश तीव्रता से संबंधित हैं।
सरकार का मकसद रात के समय सामने से आने वाले वाहनों के चालकों को तेज और चकाचौंध पैदा करने वाली रोशनी से होने वाली परेशानी को कम करना है।
2028 से AHO में सिर्फ लो-बीम का प्रस्ताव
मसौदा अधिसूचना के अनुसार, 1 अप्रैल 2028 या उसके बाद नए दोपहिया वाहनों में ऑटोमैटिक हेडलैंप ऑन प्रणाली सक्रिय होने पर हेडलैंप को केवल पासिंग बीम यानी लो-बीम पर संचालित करने का प्रस्ताव है।
इसका सीधा मतलब यह है कि AHO सिस्टम के तहत हेडलैंप अपने आप चालू होने पर डिफॉल्ट रूप से हाई-बीम के बजाय लो-बीम पर रहेगा।
मौजूदा व्यवस्था में वाहन की डिजाइन और सेटिंग के आधार पर AHO सिस्टम लो-बीम या हाई-बीम से जुड़ा हो सकता है। प्रस्तावित बदलाव के बाद ऑटोमैटिक संचालन के दौरान इसे लो-बीम तक सीमित करने की दिशा में नियम बनाया जा सकता है।
आखिर सरकार को ऐसा नियम लाने की जरूरत क्यों पड़ी?
रात में वाहन चलाते समय सामने से आने वाली तेज हेडलाइट कई बार चालक की आंखों पर सीधा असर डालती है। अचानक तेज रोशनी पड़ने से कुछ समय के लिए सड़क और सामने मौजूद वाहन स्पष्ट दिखाई नहीं देते।
खासकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह स्थिति जोखिम भरी हो सकती है। यदि सामने से आने वाले वाहन की रोशनी आंखों पर पड़े तो चालक को सड़क, पैदल यात्री, गड्ढे या अन्य वाहनों को पहचानने में परेशानी हो सकती है।
इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए सरकार हेडलैंप की रोशनी को नियंत्रित करने के साथ-साथ ऑटोमैटिक प्रणाली के संचालन में भी बदलाव का प्रस्ताव लेकर आई है।
सिर्फ लो-बीम ही नहीं, रोशनी की तीव्रता भी घटाने की तैयारी
प्रस्तावित बदलाव केवल AHO तक सीमित नहीं है। मसौदा अधिसूचना में हेडलैंप की अधिकतम अनुमत प्रकाश तीव्रता को कम करने का भी प्रस्ताव रखा गया है।
दोपहिया वाहनों के लिए अधिकतम अनुमत प्रकाश तीव्रता को मौजूदा 1.5 लाख कैंडेला से घटाकर 1 लाख कैंडेला करने का प्रस्ताव है।
वहीं चारपहिया वाहनों के लिए यह सीमा 2.25 लाख कैंडेला से घटाकर 1.5 लाख कैंडेला करने का प्रस्ताव दिया गया है।
यहां कैंडेला यानी cd प्रकाश की तीव्रता मापने की इकाई है।
इसका बाइक और स्कूटर मालिकों पर क्या असर होगा?
प्रस्तावित नियम मुख्य रूप से नए वाहनों के लिए है। इसलिए इसे मौजूदा बाइक और स्कूटर मालिकों पर तत्काल लागू होने वाले प्रतिबंध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
अगर प्रस्तावित नियम अंतिम रूप में लागू होता है, तो 1 अप्रैल 2028 से नए दोपहिया वाहनों की AHO व्यवस्था में लो-बीम को प्राथमिकता दी जाएगी।
इसका उद्देश्य वाहन की रोशनी को कमजोर करना नहीं, बल्कि उसकी दिशा और तीव्रता को इस तरह नियंत्रित करना है कि चालक को पर्याप्त दृश्यता मिले और सामने से आने वाले व्यक्ति को अनावश्यक चकाचौंध का सामना न करना पड़े।
रात में सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने की कोशिश
भारत में रात के समय सड़क सुरक्षा एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। खराब दृश्यता, तेज रोशनी और हाई-बीम का गलत इस्तेमाल दुर्घटना के जोखिम को बढ़ा सकता है।
सरकार का प्रस्ताव इसी व्यापक सड़क सुरक्षा नीति का हिस्सा माना जा रहा है। लो-बीम का इस्तेमाल सामने की सड़क को रोशन करने के साथ-साथ विपरीत दिशा से आने वाले वाहन चालक की आंखों में सीधी तेज रोशनी पड़ने की संभावना कम कर सकता है।
हालांकि, वास्तविक प्रभाव इस बात पर भी निर्भर करेगा कि वाहन निर्माता नियमों का किस तरह पालन करते हैं और वाहन चालक हाई-बीम का इस्तेमाल कब और कैसे करते हैं।
क्या अभी से बदल गया है नियम?
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। यह फिलहाल मसौदा प्रस्ताव है। यानी प्रस्तावित बदलाव को अंतिम नियम मानकर यह नहीं कहा जा सकता कि सभी मौजूदा वाहनों की हेडलाइट व्यवस्था तुरंत बदल जाएगी।
मसौदा प्रक्रिया के बाद सरकार द्वारा अंतिम अधिसूचना और प्रभावी तारीख तय किए जाने पर ही नियम कानूनी रूप से लागू होगा।
इसलिए वाहन मालिकों को फिलहाल आधिकारिक अंतिम अधिसूचना का इंतजार करना चाहिए।
ड्राइविंग के दौरान हाई-बीम का इस्तेमाल भी अहम
हेडलैंप के तकनीकी नियमों के अलावा वाहन चालकों की जिम्मेदारी भी बेहद महत्वपूर्ण है। शहरों, भीड़भाड़ वाले इलाकों और सामने से वाहन आने की स्थिति में हाई-बीम का अनावश्यक इस्तेमाल दूसरे चालकों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है।
ऐसे में लो-बीम का उचित इस्तेमाल सड़क पर सभी लोगों की सुरक्षा बढ़ाने में मदद कर सकता है।
प्रस्तावित बदलाव लागू होने के बाद वाहन निर्माता, डीलर और वाहन मालिकों के लिए हेडलैंप से जुड़े मानकों को समझना और उनका पालन करना और भी महत्वपूर्ण हो जाएगा।


