विचार

Vocal Composition: ठंड और तन्हाई

कवि अरविन्द शर्मा अजनबी
रचनाकार: अरविन्द शर्मा अजनबी

Vocal Composition: शरद निशा की सर्द हवाएँ ,
ठिठुरन तन को कँपा रही है।
तन्हाई और याद तुम्हारी ,
मन को मेरे सता रही है।।

पूरी खिड़की ढकी हुई है।
बर्फ़ के झीने पर्दे से।
तकिया लाई थी जो तुमने ,
उसे सटाया सीने से ।।

ठंड ज़ोर की आज बहुत है,
नाक कहाँ है! पता नहीं !
पूरा घर मैं ढूँढ लिया ,
लिहाफ़ कहाँ है मिला नहीं ॥

सुनो! वीडियो कॉल करो और,
वीडियो पर लव यू कह दो।
आज बनाया हूँ मै खिचड़ी ,
उसे ज़रा तुम देख तो लो ॥

खिचड़ी और ठंड का होता,
देखो कोई मेल नही !
तुम बैठी हो पीहर जाकर ,
चूल्हा फूंकना खेल नहीं।।

तिल की गट्टी अलसी लड्डू ,
सासु माँ से बनवा लो।
टिकट कटा कर भाई के संग,
जल्दी से तुम आ जाओ ॥

और सुनो वो सूरत वाली,
कम्बल साथ भी रख लेना।
करता हूँ मैं याद बहुत ।
छोटकी साली से कह देना।।

सच पूछो तो बिना तुम्हारे,
घर सूना सा लगता है ।
मैं जगता हूँ रात-रात भर,
सारा दुनिया सोता है ।।

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