
नई दिल्ली/पेरिस: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने के साथ-साथ वैश्विक चुनौतियों के समाधान पर चर्चा की। इस उच्चस्तरीय वार्ता में रक्षा, व्यापार, तकनीकी नवाचार, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक शांति जैसे अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।
भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई पर ले जाने का संकल्प
पीएम मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों ने भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने और उभरती तकनीकों में संयुक्त प्रयासों पर सहमति बनी।
रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच कई बड़े समझौतों पर चर्चा हुई, जिसमें लड़ाकू विमानों, नौसेना सहयोग और रक्षा उपकरणों के संयुक्त निर्माण को लेकर रणनीतियां बनाई गईं। साथ ही, दोनों देशों ने ऊर्जा सुरक्षा, अंतरिक्ष अनुसंधान और साइबर सुरक्षा में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की।
वैश्विक चुनौतियों पर भारत-फ्रांस की साझेदारी
बैठक के दौरान पीएम मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों ने कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की। इनमें प्रमुख रूप से जलवायु परिवर्तन, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता, आतंकवाद से निपटने और वैश्विक शांति बनाए रखने जैसे विषय शामिल थे। दोनों नेताओं ने वैश्विक मंचों पर मिलकर काम करने और बहुपक्षीय संगठनों में सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया।
व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने पर जोर
भारत और फ्रांस ने द्विपक्षीय व्यापार को और बढ़ाने और निवेश के नए अवसरों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। दोनों देशों ने औद्योगिक सहयोग, ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स और डिजिटल अर्थव्यवस्था में संयुक्त निवेश को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया।
साझा विजन और भविष्य की योजनाएं
इस बैठक के दौरान भारत और फ्रांस ने अपने साझा विजन को मजबूत करने की दिशा में कई पहल की। इसमें रक्षा, विज्ञान, शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए नई योजनाएं बनाने पर भी सहमति बनी। दोनों देशों ने वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी नवाचार में संयुक्त प्रयासों को तेज करने के लिए एक दीर्घकालिक योजना पर भी चर्चा की।
निष्कर्ष
पीएम मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों की यह मुलाकात भारत-फ्रांस संबंधों को और गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई। यह बैठक न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में सहायक रही, बल्कि वैश्विक स्तर पर दोनों देशों की भूमिका को और प्रभावी बनाने के लिए भी महत्वपूर्ण रही।