‘2 साल की तपस्या से बनीं महामंडलेश्वर, अब मुझे फिल्मों में नहीं लौटना…’, ममता कुलकर्णी ने बताया फ्यूचर प्लान
बॉलीवुड की पूर्व अभिनेत्री ममता कुलकर्णी ने अध्यात्म के रास्ते पर चलने का फैसला किया। महामंडलेश्वर बनने के बाद उन्होंने कहा कि अब फिल्मों में वापसी का सवाल ही नहीं।

ममता कुलकर्णी का सफर:
ममता कुलकर्णी, जो कभी बॉलीवुड में अपनी ग्लैमरस छवि के लिए जानी जाती थीं, अब अध्यात्म के पथ पर चल पड़ी हैं। दो साल की कठोर तपस्या के बाद, उन्हें महामंडलेश्वर की उपाधि दी गई। यह यात्रा उनके जीवन में बड़ा बदलाव लेकर आई है।
फिल्मों में वापसी का सवाल नहीं:
अपने फ्यूचर प्लान के बारे में ममता कुलकर्णी ने साफ किया कि वे अब फिल्मों में वापस नहीं लौटेंगी। उन्होंने कहा, “अध्यात्म में ही मेरा जीवन है। मैंने सांसारिक मोह को त्याग दिया है। अब मेरा मकसद मानवता की सेवा और आध्यात्मिकता का प्रसार करना है।”
महामंडलेश्वर बनने का अनुभव:
ममता ने बताया कि महामंडलेश्वर की उपाधि पाने के लिए उन्होंने 2 साल तक कठोर तपस्या की। इस दौरान उन्होंने सभी सांसारिक सुख-सुविधाओं को त्याग दिया। उनके अनुसार, यह अनुभव उनके जीवन को एक नई दिशा देने वाला था।
अध्यात्म की ओर रुझान:
ममता ने अपनी जीवनशैली में बदलाव की वजह बताते हुए कहा, “फिल्मी दुनिया के ग्लैमर और चकाचौंध से दूर, मैंने शांति और सुकून के लिए अध्यात्म का रास्ता चुना। यहां मुझे आत्मिक संतोष मिला।”
फिल्म इंडस्ट्री के लिए संदेश:
ममता कुलकर्णी ने बॉलीवुड के साथियों को संदेश देते हुए कहा कि असली शांति बाहरी दुनिया में नहीं, बल्कि आत्मा के भीतर है। उन्होंने कहा कि अध्यात्म का रास्ता चुनने से जीवन को सच्चा अर्थ मिलता है।
ममता कुलकर्णी का भविष्य:
अब ममता का लक्ष्य आध्यात्मिकता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाना है। वे आने वाले समय में ध्यान और योग पर केंद्रित कार्यक्रम चलाने की योजना बना रही हैं।
निष्कर्ष:
ममता कुलकर्णी का यह रूप उनकी पिछली छवि से बिल्कुल अलग है। उनका यह बदलाव उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो जीवन में नई दिशा और सुकून की तलाश कर रहे हैं।