Trump-Modi Meet: आतंकवाद के खिलाफ और मजबूती से लड़ेंगे भारत-अमेरिका, ट्रंप-मोदी के बयान से भड़का पाकिस्तान
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात में आतंकवाद के खिलाफ सहयोग मजबूत करने पर जोर दिया गया। दोनों नेताओं के बयान से पाकिस्तान तिलमिला उठा और कड़ा विरोध जताया।

नई दिल्ली/वाशिंगटन: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हाल ही में हुई मुलाकात ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। इस बैठक में दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका संबंधों को और अधिक मजबूत करने पर जोर दिया, खासतौर पर आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त लड़ाई को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा की।
आतंकवाद के खिलाफ सहयोग पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी और डोनाल्ड ट्रंप ने इस बैठक में आतंकवाद के खिलाफ भारत और अमेरिका की साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों नेताओं ने आतंकवाद को वैश्विक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया और इस पर कड़ी कार्रवाई करने की बात कही। ट्रंप ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा कि कुछ देश आतंकवाद को संरक्षण देते हैं और ऐसे देशों के खिलाफ सख्त रुख अपनाना जरूरी है।
पाकिस्तान ने जताई नाराजगी
ट्रंप और मोदी के बयानों के बाद पाकिस्तान बौखला गया है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि भारत और अमेरिका उनके देश को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। पाकिस्तान ने यह भी दावा किया कि उसने हमेशा आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सहयोग किया है और उस पर लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं।
चुनावों से पहले ट्रंप का बड़ा दांव?
डोनाल्ड ट्रंप इस साल अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। इस मुलाकात को उनके चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है, जिससे भारतीय-अमेरिकी समुदाय को लुभाने की कोशिश की जा रही है। ट्रंप पहले भी भारत और मोदी की खुलकर तारीफ कर चुके हैं, और इस बार भी उन्होंने भारत-अमेरिका संबंधों को ‘सबसे मजबूत साझेदारी’ बताया।
मोदी सरकार की प्रतिक्रिया
भारत सरकार की ओर से कहा गया कि अमेरिका के साथ आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सहयोग जारी रहेगा। भारत ने पाकिस्तान को इशारों-इशारों में चेतावनी देते हुए कहा कि वह सीमा पार आतंकवाद को लेकर किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं करेगा।
क्या होगा अगला कदम?
इस मुलाकात के बाद भारत और अमेरिका के बीच सुरक्षा सहयोग और मजबूत होने की संभावना है। वहीं, पाकिस्तान इस कूटनीतिक वार्ता से असहज महसूस कर रहा है और अपनी स्थिति को बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर समर्थन जुटाने की कोशिश कर सकता है।
आने वाले दिनों में इस बैठक के असर को लेकर कई बड़े फैसले देखने को मिल सकते हैं, जो दक्षिण एशिया की राजनीति को नई दिशा देंगे।