“AAP-कांग्रेस साथ लड़ते तो बदल जाता नतीजा! इन 10 सीटों पर गठबंधन न करने का पड़ा सीधा असर”
"अगर AAP और कांग्रेस मिलकर लड़ते तो नतीजे कुछ और होते? इन 10 सीटों पर गठबंधन की कमी का दिखा बड़ा असर"

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 27 वर्षों के बाद सत्ता में वापसी करते हुए 70 में से 40 सीटों पर जीत हासिल की। वहीं, आम आदमी पार्टी (AAP) को 17 सीटों पर संतोष करना पड़ा, जबकि कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत सकी। हालांकि, चुनावी विश्लेषण से पता चलता है कि यदि AAP और कांग्रेस ने गठबंधन किया होता, तो चुनावी नतीजे अलग हो सकते थे।
विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली की 12 सीटें ऐसी थीं, जहां कांग्रेस प्रत्याशियों को मिले वोटों की संख्या AAP प्रत्याशियों की हार के अंतर से अधिक थी। उदाहरण के लिए, नई दिल्ली सीट पर भाजपा के प्रवेश वर्मा ने AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल को 4,089 वोटों से हराया, जबकि कांग्रेस के संदीप दीक्षित को 4,568 वोट मिले। यदि कांग्रेस और AAP ने मिलकर चुनाव लड़ा होता, तो इन सीटों पर भाजपा की जीत को रोका जा सकता था।
चुनाव से पहले, कांग्रेस और AAP के बीच गठबंधन की संभावनाओं पर चर्चा हुई थी, लेकिन दोनों पार्टियों के बीच आपसी मतभेदों के कारण यह संभव नहीं हो सका। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, “AAP को जिताना हमारी जिम्मेदारी नहीं है। हम वहां जोर लगाएंगे जहां हमारे पास राजनीतिक संभावना है और उन्हें जीतने की कोशिश करेंगे।”
इस चुनावी परिणाम ने विपक्षी दलों के बीच एकजुटता की कमी को उजागर किया है, जिससे भाजपा को लाभ हुआ। यदि भविष्य में विपक्षी दल मिलकर चुनाव लड़ने की रणनीति अपनाते हैं, तो चुनावी समीकरण बदल सकते हैं।