
घटना का विवरण:
एक दिल दहला देने वाली घटना में, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे एक व्यक्ति को 7 साल से बेड़ियों में बांधकर रखने का मामला सामने आया है। यह मामला [शहर/गांव का नाम] का है, जहां एक रेस्क्यू टीम उसे बचाने पहुंची, लेकिन उसकी मां ने हंगामा खड़ा कर दिया।
रेस्क्यू टीम का हस्तक्षेप:
जब रेस्क्यू टीम शख्स को छुड़ाने के लिए उसके घर पहुंची, तो उसकी मां ने टीम के प्रयासों का विरोध किया। उनका दावा था कि उनका बेटा जादू-टोना का शिकार है और उसे बाहर निकालना सही नहीं होगा।
मां का आरोप:
मां का कहना था, “उसके साथ जो भी हो रहा है, वह किसी बाहरी ताकत का असर है। मैंने उसे बेड़ियों में इसलिए बांधा है ताकि वह खुद को और दूसरों को नुकसान न पहुंचाए।”
पड़ोसियों का बयान:
पड़ोसियों के मुताबिक, यह व्यक्ति पहले सामान्य जीवन जीता था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से उसकी मानसिक स्थिति बिगड़ने लगी। परिवार ने इसे इलाज की बजाय अंधविश्वास के तौर पर लिया और उसे बेड़ियों में जकड़ दिया।
मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी:
मामला मानसिक स्वास्थ्य और उससे जुड़े अंधविश्वास को उजागर करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सही समय पर इलाज से ऐसी स्थिति से बचा जा सकता था।
रेस्क्यू टीम की प्रतिक्रिया:
रेस्क्यू टीम के एक सदस्य ने कहा, “हमने कई बार परिवार को समझाने की कोशिश की कि यह मानसिक बीमारी का मामला है, लेकिन वे इसे जादू-टोना मानकर इलाज से इनकार करते रहे।”
क्या कहता है कानून?
मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम के तहत किसी व्यक्ति को बेड़ियों में बांधकर रखना गैरकानूनी है। ऐसे मामलों में परिवार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
निष्कर्ष:
यह घटना मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के प्रति जागरूकता और अंधविश्वास को समाप्त करने की आवश्यकता को उजागर करती है। सरकार और सामाजिक संगठनों को इस दिशा में कदम उठाने चाहिए।