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श्री रामलला मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास का निधन, सीएम योगी ने जताया शोक

रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास का 87 वर्ष की उम्र में निधन, मुख्यमंत्री योगी ने श्रद्धांजलि अर्पित की

अयोध्या/लखनऊ, 12 फरवरी: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास (87) का बुधवार सुबह लखनऊ स्थित पीजीआई में निधन हो गया। वह बीते कई दिनों से अस्वस्थ थे। उनके निधन की खबर मिलते ही राजनीतिक और धार्मिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे आध्यात्मिक जगत की अपूर्णीय क्षति बताते हुए आचार्य को श्रद्धांजलि अर्पित की और शोक संतप्त अनुयायियों को दुख सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।

रामलला की सेवा में समर्पित जीवन

आचार्य सत्येंद्र दास 1993 से श्रीरामलला के मुख्य पुजारी थे। वह विवादित ढांचे के गिरने से लेकर भव्य मंदिर के निर्माण तक के साक्षी बने। जब 1992 में उन्हें रामलला का पुजारी नियुक्त किया गया, तब उनका वेतन सिर्फ 100 रुपये था। उन्होंने 34 वर्षों तक रामलला की सेवा की और टेंट में स्थापित रामलला से लेकर भव्य मंदिर में विराजमान होने तक इस दायित्व को निभाया।

मुख्य पुजारी के रूप में विशेष अधिकार

राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने उन्हें मुख्य पुजारी के रूप में बनाए रखा था और उन्हें किसी भी समय रामलला की पूजा करने की स्वतंत्रता दी गई थी। हाल ही में उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से कार्यमुक्त करने की इच्छा जताई थी, लेकिन ट्रस्ट ने इनकार कर दिया और उन्हें सम्मानपूर्वक इस भूमिका में बनाए रखा।

अयोध्या से आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत

आचार्य सत्येंद्र दास संतकबीर नगर के एक ब्राह्मण परिवार से थे। 1950 के दशक की शुरुआत में वे अयोध्या आए और अभिराम दास के शिष्य बने, जो 1949 में मंदिर में रामलला की मूर्ति स्थापना करने वालों में से एक थे। वे राम विलास वेदांती और हनुमान गढ़ी के संत धर्मदास के गुरुभाई थे।

पवित्र दिन ली अंतिम सांस

आचार्य सत्येंद्र दास ने माघ पूर्णिमा के पवित्र दिन प्रातः 7 बजे पीजीआई में अंतिम सांस ली। उनके निधन पर राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय सहित मंदिर प्रबंधन के अन्य लोगों ने गहरी संवेदना व्यक्त की।

स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती

बीते रविवार को उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें श्रीराम चिकित्सालय में भर्ती कराया गया। ब्लड प्रेशर बढ़ने के कारण उन्हें पहले मेडिकल कॉलेज और फिर पीजीआई रेफर किया गया। चार दिन पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं पीजीआई पहुंचे थे और उनका हालचाल जाना था।

आचार्य सत्येंद्र दास का निधन राम जन्मभूमि के एक महत्वपूर्ण युग के अंत का प्रतीक है। उनका योगदान हमेशा स्मरणीय रहेगा।

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