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तेलंगाना टनल हादसा: 30 घंटे से फंसे श्रमिकों का रेस्क्यू जारी, सुरक्षित बाहर निकलने की संभावना कम

तेलंगाना सुरंग हादसा: बचाव दल की कड़ी मशक्कत जारी, फंसे श्रमिकों को सुरक्षित निकालने की कोशिश

तेलंगाना : के नागरकुरनूल जिले में श्रीशैलम लेफ्ट बैंक कैनाल (SLBC) सुरंग हादसे में पिछले 30 घंटों से फंसे आठ मजदूरों को बचाने के प्रयास जारी हैं। सेना, नौसेना, एनडीआरएफ और अन्य सुरंग विशेषज्ञों की टीमें बचाव कार्य में जुटी हैं, लेकिन हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं।

रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, लेकिन उम्मीदें कमजोर

सिंगरेनी कोलियरीज के महाप्रबंधक श्रीनिवास रेड्डी के अनुसार, सुरंग में 11 किलोमीटर तक पानी भर गया है, जिससे बचाव कार्य में दिक्कतें आ रही हैं। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के सकुशल बाहर निकलने की संभावना बेहद कम है, लेकिन बचाव दल पूरी कोशिश कर रहा है।

भारतीय सेना और एनडीआरएफ की टीमें मैदान में

रेस्क्यू ऑपरेशन में भारतीय सेना के बाइसन डिवीजन की इंजीनियर टास्क फोर्स (ETF) को तैनात किया गया है। बचाव दल उच्च क्षमता वाले पंप, बख्तरबंद नली, उत्खननकर्ता और बुलडोजर के जरिए मलबा हटाने और सुरंग को सुरक्षित बनाने में जुटा हुआ है।

टनल में फंसे लोगों से संपर्क नहीं हो सका

जिला कलेक्टर बी संतोष ने बताया कि हादसे के वक्त करीब 70 मजदूर काम कर रहे थे, जिनमें से अधिकतर बचकर बाहर निकल आए, लेकिन आठ लोग अब भी फंसे हुए हैं। बचावकर्मियों को सुरंग बोरिंग मशीन तक पहुंचने में सफलता मिली है, लेकिन गाद और पानी के कारण आगे बढ़ना मुश्किल हो रहा है।

राज्यपाल ने लिया संज्ञान, राहत कार्य तेज

तेलंगाना के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने जिला कलेक्टर से फोन पर बात कर रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिया कि श्रमिकों को सुरक्षित निकालने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएं।

35 साल पुरानी परियोजना, 9 किलोमीटर का निर्माण बाकी

एसएलबीसी परियोजना को 35 साल पहले मंजूरी मिली थी, लेकिन अब तक इसका काम पूरा नहीं हो सका है। 44 किलोमीटर लंबी सुरंग में अभी 9 किलोमीटर का निर्माण बाकी है। हादसे के बाद राज्य सरकार पर परियोजना में देरी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

आज शाम तक राहत की उम्मीद?

तेलंगाना सरकार में मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी ने कहा कि फंसे हुए मजदूरों को निकालने की हरसंभव कोशिश की जा रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आज शाम तक उन्हें बचा लिया जाएगा। हालांकि, बचाव कार्य की जटिलताओं को देखते हुए यह आसान नहीं दिख रहा।

सरकार और प्रशासन पूरी ताकत से जुटा है, लेकिन मजदूरों के परिवारों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। अब देखना होगा कि बचाव दल कब तक इस चुनौती से पार पाता है।

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