उत्तर प्रदेश

राणा सांगा विवाद: अखिलेश ने रामजीलाल के बयान का किया समर्थन, बोले- बाएं पैर के अंगूठे से हुआ शिवाजी का अभिषेक

रामजीलाल सुमन के बयान पर बवाल, अखिलेश यादव ने किया समर्थन – भाजपा ने बताया हिंदू विरोधी मानसिकता

लखनऊ: राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन के राणा सांगा को लेकर दिए गए विवादित बयान का अब समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव ने समर्थन किया है। रविवार को लखनऊ में अखिलेश ने कहा कि अगर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता औरंगजेब पर चर्चा के लिए इतिहास को खंगाल सकते हैं, तो रामजीलाल सुमन ने भी इतिहास के एक पन्ने का ही जिक्र किया है।

रामजीलाल सुमन ने क्या कहा था?

21 मार्च को संसद में रामजीलाल सुमन ने कहा था कि भारतीय मुसलमान बाबर को अपना आदर्श नहीं मानते, बल्कि वे पैगंबर मोहम्मद और सूफी परंपरा का पालन करते हैं। उन्होंने आगे कहा, “लेकिन, बाबर को यहां लाया कौन था? राणा सांगा ने ही उसे इब्राहिम लोदी से युद्ध के लिए आमंत्रित किया था। अगर मुसलमानों को बाबर का वंशज कहा जाता है, तो हिंदुओं को भी राणा सांगा का वंशज कहा जाना चाहिए।”

उनके इस बयान से संसद में बवाल मच गया। भाजपा नेताओं ने इसे हिंदू समुदाय का अपमान करार दिया और सपा पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया।

अखिलेश यादव का पलटवार

विवाद बढ़ने पर अखिलेश यादव सुमन के समर्थन में उतर आए। उन्होंने कहा, “अगर रामजीलाल ने इतिहास के किसी पन्ने का जिक्र किया है और उसमें कुछ तथ्य हैं, तो इसमें विवाद कैसा? इतिहास को हमने नहीं लिखा, यह पहले से दर्ज है।”

अखिलेश ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर भाजपा इतिहास के पन्नों को चुनिंदा तरीके से उठाएगी, तो फिर पूरा इतिहास देखा जाएगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, “छत्रपति शिवाजी के राज्याभिषेक के दौरान किसी ने हाथ से उनका अभिषेक नहीं किया था, बल्कि उनके बाएं पैर के अंगूठे से किया गया था। क्या भाजपा आज इसकी निंदा करेगी?”

भाजपा का विरोध

भाजपा ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा नेताओं ने कहा कि रामजीलाल सुमन का बयान हिंदू समाज का अपमान है और अखिलेश यादव का समर्थन यह साबित करता है कि सपा हिंदू विरोधी मानसिकता रखती है।

इतिहास के नाम पर सियासत तेज

रामजीलाल सुमन के बयान और अखिलेश यादव के समर्थन के बाद यूपी की राजनीति गरमा गई है। भाजपा और हिंदू संगठनों ने इस बयान की निंदा की है, जबकि सपा इसे भाजपा की “चुनिंदा इतिहास राजनीति” करार दे रही है। इस मुद्दे पर दोनों पक्ष आमने-सामने आ चुके हैं और यह विवाद जल्द ठंडा पड़ने वाला नहीं दिख रहा।

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