दलहन नवाचार पर जागरूकता कार्यक्रम, वैज्ञानिकों ने की चर्चा
दलहन नवाचार पर जोर: वैज्ञानिकों ने दिए उद्यमिता और खेती के आधुनिक तकनीकों के सुझाव

बक्शी : का तालाब स्थित चंद्रभानु गुप्त कृषि महाविद्यालय में दलहन नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने दलहन प्रसंस्करण, उपयोग और कृषि तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की।
दलहन उत्पादों के नवाचार पर जोर
कार्यक्रम में भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. आर. के. मिश्रा ने बताया कि दाल निर्माण के दौरान निकलने वाले अवशेषों में प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में होते हैं। इनमें एंटीऑक्सीडेंट और फेनोल्स की अधिकता के कारण इन्हें खाद्य उत्पादों में उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने दलहन से बिस्किट, दालमोट और सूप बनाने की विधि समझाई।
संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. मनमोहन देव ने दलहन उत्पादों की प्रोसेसिंग, लाइसेंसिंग और यूनिट लगाने में आवश्यक मशीनों पर विस्तार से जानकारी दी।
दलहन का महत्व और उन्नत खेती पर जोर
महाविद्यालय के प्रबंधक डॉ. तेज प्रकाश सिंह ने कहा कि दलहन प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत है और इससे मिलने वाली प्रोटीन की गुणवत्ता मांस से भी बेहतर होती है।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. गजेंद्र सिंह ने कहा कि दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए महाविद्यालय में शोध कार्यों को बढ़ाया जाएगा।
दलहन फसलों की चुनौतियां और समाधान
पादप रोग विज्ञान विभाग के सह-आचार्य डॉ. योगेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि दलहन फसलों में उकठ रोग (Wilt Disease) की समस्या अधिक होती है। इसके समाधान के लिए प्रतिरोधी प्रजातियों के चयन की सलाह दी गई।
कीट विज्ञान विभाग के सह-आचार्य डॉ. सत्येंद्र कुमार सिंह ने कहा कि समय पर बुवाई करने से कीटों का खतरा कम रहता है। उन्होंने जैविक उत्पादों के उपयोग पर विशेष जोर दिया।
छात्रों की भागीदारी और समापन
इस एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम में महाविद्यालय के कृषि प्रसार विभाग की सहायक आचार्य डॉ. के. डी. सिंह, डॉ. स्वाहा सी. चंदा, श्रीमती प्रतिमा सिंह, देवा आशीष, उमेश कुमार सहित 135 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. सत्येंद्र कुमार सिंह ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. उरूज आलम सिद्दीकी ने दिया।
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