वक्फ संशोधन विधेयक 2024: संसद में संख्या बल और सियासी समीकरण
वक्फ संशोधन विधेयक 2024: संसद में संख्या बल, समर्थन और राजनीतिक समीकरणों की पूरी जानकारी

लोकसभा में बुधवार (2 अप्रैल) को वक्फ संशोधन विधेयक, 2024 पेश किया गया। इस विधेयक को पहले संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजा गया था और अब इसे नए सिरे से सदन में लाया गया है। बहस के बाद इस पर मतदान होगा, लेकिन इससे पहले यह समझना जरूरी है कि संसद में किसके पास कितना समर्थन है और यह विधेयक कैसे पास होगा?
लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक को कितना समर्थन?
लोकसभा में कुल 543 सीटें होती हैं, लेकिन इस वक्त 542 सांसद हैं। पश्चिम बंगाल की बशीरहाट सीट रिक्त है। विधेयक पारित करने के लिए 272 सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी।
(i) एनडीए (सत्तापक्ष)
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भाजपा: 240 सांसद
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तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी): 16 सांसद
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जनता दल यूनाइटेड (जदयू): 12 सांसद
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शिवसेना (शिंदे गुट), रालोद, लोजपा (रामविलास), जनसेना पार्टी, अपना दल, हम, एनसीपी (अजित पवार गुट) आदि भी समर्थन में हैं।
➡️ कुल मिलाकर एनडीए के पास बहुमत से अधिक सांसद हैं, जिससे विधेयक के पास होने की संभावना मजबूत है।
(ii) विपक्ष
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कांग्रेस: 99 सांसद
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समाजवादी पार्टी (सपा): 37 सांसद
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तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), डीएमके, आम आदमी पार्टी, राजद, वाम दल, एआईएमआईएम और अन्य विपक्षी दल विधेयक के खिलाफ हैं।
➡️ कुल मिलाकर विपक्ष के पास जरूरी संख्या नहीं है, जिससे उनकी राह मुश्किल दिख रही है।
(iii) निर्दलीय और रुख साफ न करने वाले दल
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निर्दलीय सांसदों में से कुछ ने विरोध जताया है, जबकि कुछ का रुख स्पष्ट नहीं है।
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शिरोमणि अकाली दल (शिअद) और जेडपीएम ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं।
राज्यसभा में विधेयक को कितना समर्थन?
राज्यसभा में कुल 245 सीटें होती हैं, लेकिन इस वक्त 236 सांसद हैं। 9 सीटें खाली हैं। बहुमत के लिए 119 सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी।
(i) एनडीए (सत्तापक्ष)
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भाजपा: 98 सांसद
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जदयू, टीडीपी, राकांपा (अजित पवार गुट), शिवसेना (शिंदे गुट) और कई छोटे दलों ने एनडीए का समर्थन किया है।
➡️ मतलब राज्यसभा में भी विधेयक के पास होने की संभावना मजबूत है।
(ii) विपक्ष
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कांग्रेस: 27 सांसद
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टीएमसी, डीएमके, सपा, आप, राजद, माकपा, एआईएमआईएम और अन्य दल विरोध में हैं।
➡️ राज्यसभा में विपक्षी एकता मजबूत है, लेकिन संख्याबल कम है।
(iii) रुख साफ न करने वाले दल
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बहुजन समाज पार्टी (बसपा), मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) और भारतीय राष्ट्र समिति (बीआरएस) ने अब तक अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है।
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6 नामित सांसदों का झुकाव सरकार की ओर रहने की संभावना है।
सरकार को वक्फ संशोधन विधेयक लाने की जरूरत क्यों पड़ी?
🔹 देश में हजारों वक्फ संपत्तियों को लेकर विवाद हैं। कई मामलों में इनके दुरुपयोग और अवैध कब्जे की शिकायतें मिली हैं।
🔹 विधेयक में संशोधन कर वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को पारदर्शी और कानूनी बनाने का प्रयास किया गया है।
🔹 सरकार का दावा है कि इस विधेयक से वक्फ संपत्तियों का संरक्षण बेहतर तरीके से किया जा सकेगा।
संशोधनों पर सहमति और विवाद
✅ टीडीपी और जदयू ने सरकार के साथ कुछ शर्तों पर सहमति बनाई है, जिनमें वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण और विवादों के समाधान की प्रक्रिया शामिल है।
❌ विपक्षी दलों ने इस विधेयक को लेकर आपत्ति जताई है और इसे अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ बताया है।
➡️ अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बहस के बाद यह विधेयक कैसे आगे बढ़ता है और क्या विपक्ष इसे रोकने के लिए किसी रणनीति पर काम करता है।
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