उत्तर प्रदेश

महाकुंभ में खूब बटोर रहे हैं सुर्खियां, कौन हैं स्वर्णिम बाबा… जिनके शरीर पर लदा है सोना ही सोना

प्रयागराज: आस्था की नगरी प्रयागराज 12 साल बाद महाकुंभ 2025 के लिए पूरी तरह तैयार है. देश के कोने-कोने से साधु-संतों का यहां पर पहुंचना जारी है. वहीं, यहां पर स्वर्णिम बाबा नाम के बाबा चर्चा का केंद्र बने हुए हैं. बाबा सोने से लदे हुए हैं. वे शरीर पर गले से लेकर उंगलियों और कमर तक सोना ही सोना पहने हुए हैं, जो महाकुंभ में खूब सुर्खियां बटोर रहे हैं. बता दें कि बाबा नारायण स्वामी (स्वर्णिम बाबा) को निरंजनी अखाड़े का महामंडलेश्वर बनाने का निर्णय लिया गया है. वे केरल से संगमनगरी पहुंचे हैं. उन्हें महंगी गाड़ियां, राजसी अंदाज और महंगी चीजों का शौक है. वे शरीर में 6 किलो सोना धारण करके चलते हैं.

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MTech Engineer Baba

महाकुंभ मेले में कई बाबाओं के दर्शन होंगे. स्वर्णिम बाबा जैसे कई संत यहां पर उपस्थित रहेंगे. ऐसे ही एक संत हैं निरंजनी अखाड़े के 55 वर्षीय नागा संत दिगंबर कृष्ण गिरि (Naga Saint Digambar Krishna Giri).  नागा संन्यासियों में सबसे अलग दिगंबर कृष्ण गिरि ही हैं. इनकी फर्राटेदार अंग्रेजी सुनकर वहां से गुजरने वाले दांतों तले उंगलियां दबा लेते हैं. नागा संत दिगंबर कृष्ण गिरि दरअसल एमटेक इंजीनियर (MTech Engineer) हैं. कर्नाटक यूनिवर्सिटी के टॉपर रहे चुके हैं. इंजीनियरिंग करने के बाद मल्टीनेशनल कंपनी के सालाना 40 लाख रुपये पैकेज वाली नौकरी मिली. हालांकि नागा साधुओं के वैभव और उनकी आध्यात्मिकता से प्रभावित होकर कृष्ण गिरि ने 40 लाख की नौकरी छोड़कर सन्यासी बन गए.

Oxygen Baba

इसी तरह एक बाबा हैं Oxygen वाले बाबा. 62 वर्षीय महंत इंद्र गिरी महाराज (Mahant Indra Giri Maharaj). महंत इंद्र गिरी महाराज को लोग ‘ऑक्सीजन’ बाबा (Oxygen Baba) के नाम से जानते हैं. महंत इंद्र गिरी हमेशा अपने साथ ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर चलते हैं. इसके कारण लोग इन्हें ‘ऑक्सीजन’ वाले बाबा कहते हैं. महंत इंद्र गिरी महाराज आवाहन अखाड़े के महंत हैं. चार साल पहले साल 2021 में कोरोना की महामारी के दौर में कोविड की चपेट में आने से उनके फेफड़े तकरीबन पूरी तरह खराब हो गए थे. वर्तमान में उनके दोनों फेफड़े 97 प्रतिशत से ज्यादा डैमेज हैं. वे ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं. डॉक्टर्स ने जवाब दे दिया था. इन्हें बताया गया कि जीवन अब तभी तक है, जब तक आर्टिफिशियल ऑक्सीजन के जरिए सांस चलती रहेगी. इतना ही नहीं उन्हें चलने फिरने और सफर करने से बचने को भी कहा गया था.

NEWS SOURCE Credit : lalluram

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