भारत में एशिया का पहला वर्टिकल लिफ्ट ब्रिज: शिप के गुजरते ही 72 फीट ऊपर उठेगा पुल, जानें इसकी खासियतें
भारत को मिला एशिया का पहला वर्टिकल लिफ्ट ब्रिज, जो शिप गुजरते ही 72 फीट ऊंचा हो जाएगा – जानिए इसकी अनोखी तकनीक और विशेषताएं।

नई दिल्ली: भारत में एशिया का पहला वर्टिकल लिफ्ट ब्रिज तैयार हो गया है, जो जरूरत पड़ने पर 72 फीट ऊपर उठ सकता है ताकि पानी के जहाज आसानी से गुजर सकें। यह ब्रिज देश की तकनीकी प्रगति और आधुनिक बुनियादी ढांचे का एक शानदार उदाहरण है।
क्या है वर्टिकल लिफ्ट ब्रिज?
वर्टिकल लिफ्ट ब्रिज एक ऐसा पुल होता है जिसका एक हिस्सा ऊपर की ओर उठ सकता है, जिससे पानी के जहाज और बड़ी नौकाएं नीचे से गुजर सकती हैं। यह पुल रेलवे और सड़क यातायात दोनों के लिए उपयुक्त होता है। जब कोई जहाज पुल के नीचे से गुजरता है, तो ब्रिज का मध्य भाग 72 फीट तक ऊंचा उठ जाता है और जैसे ही जहाज निकल जाता है, इसे वापस नीचे कर दिया जाता है।
इस ब्रिज की खासियतें:
✅ एशिया का पहला वर्टिकल लिफ्ट ब्रिज – आधुनिक इंजीनियरिंग का बेहतरीन नमूना
✅ 72 फीट तक ऊंचा उठने की क्षमता – जहाजों और नौकाओं को गुजरने की सुविधा
✅ रेलवे और सड़क यातायात दोनों के लिए उपयोगी
✅ नई तकनीक से लैस – स्वचालित सिस्टम से नियंत्रित
✅ समुद्री व्यापार और यातायात को देगा बढ़ावा
कहां बना है यह ब्रिज?
यह वर्टिकल लिफ्ट ब्रिज तमिलनाडु के पंबन में बनाया गया है, जो भारतीय रेलवे का एक ऐतिहासिक प्रोजेक्ट है। यह ब्रिज पुराने पंबन ब्रिज का आधुनिक और उन्नत संस्करण है। यह भारत के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है क्योंकि इससे समुद्री परिवहन और रेल संपर्क दोनों को मजबूती मिलेगी।
कैसे काम करेगा यह ब्रिज?
- जब कोई बड़ा जहाज इस ब्रिज के नीचे से गुजरना चाहेगा, तो पुल का मध्य भाग ऑटोमेटिक सिस्टम की मदद से 72 फीट ऊपर उठ जाएगा।
- जहाज के निकलने के बाद इसे फिर से नीचे लाया जाएगा ताकि रेल और सड़क यातायात सुचारू रूप से जारी रह सके।
- इस पूरी प्रक्रिया को कंट्रोल रूम के माध्यम से मॉनिटर किया जाएगा ताकि सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
ब्रिज का महत्व:
- रेलवे और शिपिंग इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा।
- समुद्री व्यापार के लिए नई संभावनाएं खुलेंगी।
- पर्यटन और आर्थिक विकास को भी फायदा होगा।
- तमिलनाडु और रामेश्वरम के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी।
निष्कर्ष:
भारत का यह पहला वर्टिकल लिफ्ट ब्रिज न केवल देश के इन्फ्रास्ट्रक्चर में एक नया अध्याय जोड़ता है, बल्कि एशिया में भी अपनी अनोखी पहचान बना चुका है। इस ब्रिज के जरिए रेल और समुद्री परिवहन को नया आयाम मिलेगा और यह भारत के आधुनिक विकास और इंजीनियरिंग कौशल का शानदार उदाहरण साबित होगा।