नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को नागपुर स्थित एक मंदिर दर्शन कार्यक्रम में महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि दुनिया भारत को उसकी आर्थिक ताकत से नहीं बल्कि उसके आध्यात्मिक ज्ञान और संस्कृति के कारण सम्मान देती है। इसी वजह से भारत को विश्वगुरु का दर्जा प्राप्त है।
भारतीय अध्यात्म को दुनिया का महत्व
मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि दुनिया का ध्यान इस बात पर नहीं कि भारत की अर्थव्यवस्था कितनी बड़ी है, बल्कि भारत के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों पर केंद्रित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की अर्थव्यवस्था चाहे तीन ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो जाए, यह कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी, क्योंकि भारत की ताकत उसके अध्यात्म में निहित है।
आर्थिक विकास और अध्यात्म का तालमेल
भागवत ने कहा कि भारतीय समाज की ताकत उसकी आध्यात्मिकता और संस्कृति में है, जो इसे वैश्विक स्तर पर अलग पहचान देती है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि भारत के आर्थिक विकास के साथ-साथ इस आध्यात्मिक विरासत को भी सम्मान और बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
विश्वगुरु बनने का महत्व
RSS प्रमुख ने यह भी कहा कि भारत विश्वगुरु इसलिए भी है क्योंकि उसकी सभ्यता और दर्शन न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। इस दृष्टिकोण से भारत को आर्थिक विकास के साथ-साथ अपने आध्यात्मिक मूल्यों को बनाए रखना होगा।
निष्कर्ष
मोहन भागवत के इस वक्तव्य से स्पष्ट होता है कि भारत के विश्वगुरु बनने की जड़ें केवल आर्थिक मापदंडों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उसकी संस्कृति, आध्यात्म और परंपराएं इस पहचान को मजबूत करती हैं। भविष्य में भारत की अर्थव्यवस्था में वृद्धि के साथ-साथ इन आध्यात्मिक मूल्यों का संरक्षण भी देश के लिए अत्यंत आवश्यक होगा।