दिल्ली हाईकोर्ट: ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) की डिग्री से जुड़ी सूचना को सार्वजनिक करने के केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के आदेश को पलट दिया है। यह मामला लंबे समय से चर्चा में था, जिसमें एक आरटीआई एक्टिविस्ट ने पीएम मोदी की शैक्षणिक योग्यता से संबंधित रिकॉर्ड की मांग की थी।
CIC का आदेश और उस पर रोक
केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने दिल्ली यूनिवर्सिटी और गुजरात यूनिवर्सिटी को निर्देश दिया था कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बैचलर डिग्री का रिकॉर्ड सार्वजनिक करें। इस आदेश को चुनौती देते हुए विश्वविद्यालयों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अब हाईकोर्ट ने CIC के आदेश को रद्द कर दिया है।
कोर्ट की दलील
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि किसी भी व्यक्ति की शैक्षणिक डिग्री से जुड़ी जानकारी व्यक्तिगत सूचना (Personal Information) के दायरे में आती है और इसे सार्वजनिक करना निजता (Privacy) का उल्लंघन होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह मामला जनहित (Public Interest) की श्रेणी में नहीं आता, इसलिए सूचना को उजागर नहीं किया जा सकता।
मामला क्यों है चर्चा में?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक योग्यता को लेकर लंबे समय से विवाद और सवाल उठते रहे हैं। कई आरटीआई एक्टिविस्ट और विपक्षी नेता उनकी डिग्री सार्वजनिक करने की मांग कर चुके हैं। हालांकि, इससे पहले भी गुजरात हाईकोर्ट और अन्य अदालतें इस सूचना को सार्वजनिक करने से इनकार कर चुकी हैं।
विशेषज्ञों की राय
कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला निजता और सूचना के अधिकार (RTI) के बीच संतुलन का उदाहरण है। जबकि आरटीआई एक्टिविस्ट इसे पारदर्शिता के खिलाफ बताते हैं। यह बहस अब भी जारी है कि सार्वजनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों की शैक्षणिक योग्यता जनता के हित में खुलासा की जानी चाहिए या नहीं।