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संघ शताब्दी वर्ष: दिल्ली में मोहन भागवत की तीन दिवसीय व्याख्यानमाला, देश की प्रमुख हस्तियों से होगा संवाद

26 से 28 अगस्त तक विज्ञान भवन में “संघ : नए क्षितिज” विषय पर होगी विचार श्रृंखला, पहले दिन साझा होगी संघ की 100 वर्षों की यात्रा

नई दिल्ली | राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर संघ प्रमुख मोहन भागवत देशभर की प्रमुख हस्तियों से सीधे संवाद करने जा रहे हैं। इस ऐतिहासिक आयोजन की शुरुआत 26 अगस्त 2025 से दिल्ली के विज्ञान भवन में होने जा रही है, जहां तीन दिवसीय व्याख्यानमाला का आयोजन किया जाएगा।


🗓️ तीन दिन, तीन चरण: संघ के अनुभव, योजना और संवाद

यह कार्यक्रम संघ शताब्दी वर्ष के ‘संघ: नए क्षितिज’ विषय पर आधारित होगा और इसमें भागवत तीन अलग-अलग दिन तीन अलग-अलग दृष्टिकोण से संवाद करेंगे:

  1. पहला दिन (26 अगस्त):

    • संघ की सौ वर्षों की यात्रा और अनुभव साझा करेंगे।

  2. दूसरा दिन (27 अगस्त):

    • भविष्य की कार्ययोजना और दिशा पर चर्चा होगी।

  3. तीसरा दिन (28 अगस्त):

    • कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख हस्तियों के सवालों का जवाब देंगे।


👥 समाज के सभी क्षेत्रों की भागीदारी

संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर के अनुसार, इस व्याख्यानमाला में सामाजिक, आर्थिक, आध्यात्मिक, खेल, शिक्षा, ज्ञान परंपरा, भाषा, इंटरप्रेन्योर और भारत में स्थित विदेशी राजनयिकों सहित 17 मुख्य और 138 सह-श्रेणियों की हस्तियों को आमंत्रित किया जा रहा है।

इससे पहले वर्ष 2018 में भी मोहन भागवत ने विज्ञान भवन में पहली बार इसी तरह का संवाद कार्यक्रम किया था, जो काफी चर्चा में रहा।


🌍 राष्ट्रीय स्तर पर व्याख्यानमाला श्रृंखला

दिल्ली के बाद यह व्याख्यानमालाएं अन्य शहरों में भी आयोजित की जाएंगी:

  • नवंबर: बेंगलुरु

  • दिसंबर: पश्चिम बंगाल

  • फरवरी: मुंबई

प्रत्येक आयोजन में उस क्षेत्र की प्रमुख सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक और सांस्कृतिक हस्तियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।


🧭 संघ का दृष्टिकोण: ‘स्व तत्व’ और ‘अपना पराक्रम’ ही भविष्य का आधार

मोहन भागवत इस व्याख्यानमाला में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर संघ की राय और दृष्टिकोण साझा करेंगे:

  • देश के विकास के लिए औपनिवेशिक मानकों को त्यागकर भारतीय ज्ञान परंपरा और क्षमताओं को केंद्र में लाने की आवश्यकता।

  • स्व तत्व (स्वभाव और संस्कृति) और पराक्रम (कर्मशीलता और आत्मबल) को नए भारत की नींव माना जाएगा।

  • समाज में सांप्रदायिक सद्भाव, एकजुटता और आत्मविश्वास को बढ़ावा देना प्राथमिक लक्ष्य रहेगा।

  • आजादी के बाद भी गुलामी की सोच से भारत को मुक्त कराना ज़रूरी है।

आंबेकर ने कहा, “देश आगे बढ़ रहा है। लेकिन इस प्रगति को स्थायी और स्वदेशी दृष्टिकोण से टिकाऊ बनाना होगा।”


🧾 कार्यक्रम का महत्व और उद्देश्य

पहलू विवरण
आयोजन संघ शताब्दी वर्ष व्याख्यानमाला
दिनांक 26-28 अगस्त 2025
स्थान विज्ञान भवन, नई दिल्ली
विषय “संघ : नए क्षितिज”
उद्देश्य संघ की यात्रा, भविष्य योजना और संवाद
आयोजक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS)
आमंत्रित वर्ग समाज के सभी क्षेत्र और विचारधाराएं

🧠 निष्कर्ष:

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्षों की यात्रा को चिह्नित करते हुए यह आयोजन केवल संघ के आत्ममंथन का अवसर नहीं है, बल्कि यह पूरे देश के विचारशील वर्ग के साथ खुले संवाद का भी मंच बन रहा है। भागवत की यह व्याख्यानमाला न केवल संघ की रणनीतिक दिशा को स्पष्ट करेगी, बल्कि समाज के भविष्य की दिशा तय करने में भी एक अहम भूमिका निभा सकती है।

News Desk

Written by News Desk

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