नई दिल्ली | कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने एक बार फिर चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने महाराष्ट्र और कर्नाटक समेत कई राज्यों की मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का हवाला देते हुए दावा किया है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को विकृत कर भाजपा के पक्ष में वोटों की चोरी की जा रही है।
📊 “लाखों नए वोटर जोड़े गए, शाम 5 बजे बाद बढ़ा टर्नआउट”
राहुल गांधी ने कहा कि महाराष्ट्र में महज 5 महीनों में ही पिछले 5 वर्षों से अधिक मतदाताओं के नाम सूची में जोड़ दिए गए, जो बेहद संदिग्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि मतदान दिवस पर शाम 5 बजे के बाद अचानक वोटर टर्नआउट में तेज़ी आई, जिससे संदेह और गहरा हो गया।
“मतदाता सूची में इस तरह के आकस्मिक बदलाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया को ही खतरे में डालते हैं,” — राहुल गांधी
🤝 “भाजपा और चुनाव आयोग की मिलीभगत”
राहुल गांधी का आरोप है कि नवंबर 2024 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा और चुनाव आयोग के बीच मिलीभगत थी। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग ने मशीन-रीडेबल वोटर लिस्ट उपलब्ध नहीं कराई, जिससे चुनाव परिणामों की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठते हैं।
“हमने जब नतीजे देखे तो हमें पूरा यकीन हो गया कि चुनाव आयोग ने भाजपा की मदद से चुनाव परिणामों को प्रभावित किया,” — राहुल गांधी
📂 “एक करोड़ नए मतदाता अचानक कहां से आए?”
राहुल गांधी ने लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच एक करोड़ नए मतदाताओं के जुड़ने को भी संदिग्ध बताया। उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों के आधार पर साफ ज़ाहिर होता है कि मतदाता सूची के साथ छेड़छाड़ हुई है।
उन्होंने सवाल उठाया कि “क्या चुनाव आयोग इस पर कोई जवाब देगा?”
🗝️ “मतदाता सूची इस देश की संपत्ति है”
राहुल गांधी ने कहा कि मतदाता सूची केवल सरकार या किसी पार्टी की नहीं, बल्कि पूरे देश की संपत्ति है। उन्होंने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि संविधानिक जिम्मेदारी निभाने में विफल रहते हुए आयोग ने उन्हें वोटर लिस्ट तक पहुँच नहीं दी।
“चुनाव आयोग हमें मतदाता सूची देने से इनकार कर रहा है। यह लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है,” — राहुल गांधी
🔍 मुद्दे की गहराई: चुनावी पारदर्शिता बनाम राजनीतिक रणनीति
प्रमुख बिंदु | विवरण |
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आरोप | वोटर लिस्ट में भाजपा के पक्ष में हेरफेर |
संदिग्ध तथ्य | 5 महीनों में लाखों वोटर जुड़े, शाम 5 बजे बाद वोटिंग में उछाल |
मांग | चुनाव आयोग से पारदर्शी वोटर लिस्ट |
दावा | एक करोड़ नए मतदाता लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच |
निष्कर्ष | आयोग की विश्वसनीयता सवालों के घेरे में |
🧭 आगे की राह क्या?
राहुल गांधी ने साफ किया है कि वह इस मुद्दे को संसद, मीडिया और अदालतों में लगातार उठाते रहेंगे। उनका उद्देश्य यह है कि चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाया जाए ताकि लोकतंत्र की नींव मजबूत हो।
🧾 निष्कर्ष:
राहुल गांधी की ये टिप्पणियां चुनाव आयोग की भूमिका और पारदर्शिता पर नई बहस को जन्म देती हैं। अगर उनके आरोपों में तथ्यात्मक आधार है, तो यह भारतीय लोकतंत्र के लिए चिंताजनक संकेत हैं। वहीं, आयोग की तरफ से अब तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है, जिससे संदेह और गहरे हो रहे हैं।