लखनऊ: उत्तर प्रदेश में MBBS की फीस बढ़ोतरी ने छात्रों और उनके अभिभावकों के बीच चिंता और नाराजगी पैदा कर दी है।
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हाल ही में कानपुर के रामा मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर में सत्र 2024-25 के लिए फीस बढ़ाकर 20% कर दी गई।
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पहले तीन साल में अधिकतम 15% वृद्धि की अनुमति थी, लेकिन इस बार यह सीमा पार कर 20% तक बढ़ोतरी कर दी गई।
केस स्टडी: भक्ति पाटील
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महाराष्ट्र की छात्रा भक्ति पाटील ने 2024-25 में रामा मेडिकल कॉलेज में MBBS प्रवेश लिया।
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प्रवेश के समय कॉलेज की फीस 12.66 लाख रुपए बताई गई थी।
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भक्ति के पिता रणजीत पाटील ने एजुकेशन लोन लेकर फीस जमा की।
फीस बढ़ने के कारण अब अभिभावक और छात्र अचानक वित्तीय दबाव में हैं। कई परिवारों को लोन बढ़ाने या अतिरिक्त भुगतान की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है:
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“MBBS जैसी पेशेवर डिग्री की फीस में अनियमित वृद्धि छात्रों की पढ़ाई पर असर डाल सकती है।”
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“जब फीस वृद्धि अधिक होती है, तो सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से कमजोर परिवारों के लिए चिकित्सा शिक्षा कठिन हो जाती है।”
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सरकार और कॉलेज प्रशासन से नियमित और पारदर्शी फीस नीति लागू करने की अपील की जा रही है।
छात्रों और अभिभावकों की नाराजगी
छात्र और अभिभावक आरोप लगा रहे हैं कि:
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फीस वृद्धि का पूर्वानुमान नहीं दिया गया, जिससे वित्तीय योजना प्रभावित हुई।
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एजुकेशन लोन की ब्याज दर और अतिरिक्त खर्च ने तनाव और चिंता बढ़ा दी।
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कई छात्र अब सपनों की पढ़ाई को लेकर असमंजस में हैं।
निष्कर्ष:
उत्तर प्रदेश में MBBS की फीस वृद्धि से यह सवाल उठता है कि कैसे आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को चिकित्सा शिक्षा तक पहुँच मिलेगी।
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20% तक की वृद्धि ने कई परिवारों के बजट को प्रभावित किया है।
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विशेषज्ञ और छात्रों का कहना है कि समीक्षा और नियंत्रित फीस वृद्धि नीति लागू की जानी चाहिए।
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साथ ही, सरकार और कॉलेज प्रशासन को स्पष्ट और समय पर सूचना देना आवश्यक है ताकि अभिभावक और छात्र वित्तीय योजना बना सकें।