नई दिल्ली। लोकसभा में वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर सोमवार को शुरू हुई विशेष चर्चा की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगभग 60 मिनट के भाषण से की। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि पार्टी ने “वंदे मातरम् के टुकड़े किए” और राष्ट्रगीत के सम्मान के साथ विश्वासघात किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं बल्कि आज़ादी के आंदोलन की आत्मा रहा है। उन्होंने कहा कि यह अंग्रेजों को दिया गया करारा जवाब था और महात्मा गांधी को भी यह गीत बेहद प्रिय था। मोदी ने बताया कि बापू इसे राष्ट्रीय गान के समान मानते थे। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर इतना पवित्र और प्रेरणादायी गीत था, तो दशकों तक इसके साथ “अन्याय” क्यों हुआ और “विश्वासघात” किसने किया।
पीएम मोदी ने अपने भाषण में वंदे मातरम् का 121 बार, “देश” शब्द का 50 बार और “भारत” का 35 बार उल्लेख किया। उन्होंने बार-बार कांग्रेस, नेहरू और जिन्ना का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि ऐतिहासिक रूप से कांग्रेस ने तुष्टिकरण की राजनीति के चलते वंदे मातरम् के महत्व को कमजोर किया।
मोदी ने कहा कि 1936 में मोहम्मद अली जिन्ना ने वंदे मातरम् के खिलाफ अभियान चलाया था, लेकिन तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व ने उसका मजबूती से विरोध करने की बजाय खुद ही अपने राष्ट्रगीत की जांच शुरू कर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि जवाहरलाल नेहरू ने मुस्लिम लीग के दबाव में आकर समझौते का रास्ता चुना।
प्रधानमंत्री ने 1906 के एक ऐतिहासिक प्रसंग का जिक्र करते हुए बताया कि बारीसाल (वर्तमान बांग्लादेश) में 10 हजार से अधिक लोगों ने वंदे मातरम् के नारे के साथ जुलूस निकाला था, जिसमें हिंदू–मुस्लिम एकता की मिसाल देखने को मिली थी। उन्होंने कहा कि बंगाल में यह नारा गली–गली में आजादी की लड़ाई का प्रतीक बन गया था।
अपने संबोधन में मोदी ने कहा कि इतिहास गवाह है कि कई स्वतंत्रता सेनानी फांसी के तख्ते पर भी “वंदे मातरम्” कहते हुए शहीद हुए। उन्होंने यह भी कहा कि जब इस गीत के 50 वर्ष पूरे हुए थे, तब देश गुलामी में जकड़ा था, जब 100 वर्ष पूरे हुए तब देश आपातकाल के दौर से गुजर रहा था, लेकिन आज 150वें वर्ष में भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है।
प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आज की कांग्रेस “INC से MNC” बन चुकी है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने अपनी विचारधारा को आउटसोर्स कर दिया है और जिन ताकतों से वह जुड़ी है, वे लगातार वंदे मातरम् पर विवाद खड़ा करते हैं।
लोकसभा में चल रही इस चर्चा के लिए कुल 10 घंटे तय किए गए हैं। सरकार की ओर से बताया गया कि राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशभर में सालभर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसमें लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में विशेष चर्चा रखी गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार सरकार द्वारा इस चर्चा को प्रमुखता देने के पीछे राष्ट्रीय भावना को मजबूत करने के साथ-साथ पश्चिम बंगाल चुनावों को ध्यान में रखने की रणनीति भी देखी जा रही है। साथ ही, 1937 के ऐतिहासिक विवाद, बंगाल विभाजन और स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास को फिर से केंद्र में लाने की कोशिश के रूप में भी इसे देखा जा रहा है।
निष्कर्ष:
लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह भाषण सिर्फ वंदे मातरम् के सम्मान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह कांग्रेस, नेहरू और जिन्ना को लेकर एक बड़े राजनीतिक विमर्श में बदल गया। यह बहस आने वाले समय में संसद और देश की राजनीति में राष्ट्रवाद, इतिहास और चुनावी रणनीति को लेकर नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है।


