रैली के दौरान विजय ने अपने पहनावे को लेकर उठाए जा रहे सवालों का भी करारा जवाब दिया। उन्होंने मंच से पूछा कि आखिर वह सूट क्यों नहीं पहन सकते? उन्होंने कहा कि कुछ लोग उनके कपड़ों और निजी पसंद को मुद्दा बनाकर राजनीतिक हमला कर रहे हैं, जबकि उनका ध्यान केवल जनता की सेवा और राज्य के विकास पर केंद्रित है।
मुख्यमंत्री विजय ने भावुक अंदाज में कहा कि जनता ने उन्हें सिर्फ मुख्यमंत्री नहीं बनाया, बल्कि राज्य का पहला सेवक बनाया है। उन्होंने कहा कि वह सत्ता का आनंद लेने नहीं बल्कि लोगों की सेवा करने के लिए राजनीति में आए हैं। उनका यह बयान रैली में मौजूद हजारों समर्थकों के बीच चर्चा का विषय बन गया।
अपने संबोधन में विजय ने यह भी दावा किया कि तमिलनाडु की राजनीति अब दो ध्रुवों में सिमट चुकी है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक रूप से वह फिर दोहराना चाहते हैं कि मुकाबला केवल डीएमके और टीवीके के बीच है। बीच में किसी अन्य दल के लिए कोई जगह नहीं बची है। उन्होंने आरोप लगाया कि डीएमके लगातार उनकी पार्टी पर हमले कर रही है, लेकिन इससे टीवीके को राजनीतिक लाभ ही मिलेगा।

रैली के दौरान विजय ने खुद की तुलना तमिलनाडु के लोकप्रिय दिवंगत नेता एमजीआर से किए जाने पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कई लोग यह कह रहे हैं कि उनकी पार्टी को पहले चुनाव में जितना समर्थन मिला, उतना एमजीआर को भी नहीं मिला था। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि वह स्वयं की तुलना एमजीआर से नहीं करते। उन्होंने कहा कि एमजीआर सिर्फ एमजीआर हैं और उनकी जगह कोई नहीं ले सकता।
विजय ने कहा कि वह एमजीआर, अन्ना और पेरियार जैसे महान नेताओं के विचारों और मार्गदर्शन का अनुसरण करते हुए जनता की सेवा करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य केवल सत्ता प्राप्त करना नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाना है।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कुछ लोगों ने उनसे उम्मीद की थी कि वह मुख्यमंत्री बनने के बाद छह महीने तक चुप रहेंगे, लेकिन वे लोग खुद छह दिन भी शांत नहीं रह पाए। उन्होंने दावा किया कि जनता ने उन राजनीतिक दलों को नकार दिया है जो वर्षों से बारी-बारी से सत्ता में रहकर लोगों को निराश करते रहे हैं।
विजय ने कहा कि तमिलनाडु की जनता ने उन्हें अपना भाई मानकर जिम्मेदारी सौंपी है और वह इस भरोसे को कभी टूटने नहीं देंगे। उन्होंने वादा किया कि उनकी सरकार राज्य के अधिकारों, विकास और जनता के हितों पर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी।
रैली के अंत में विजय ने तिरुचिरापल्ली की जनता का विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में भले ही वह पेरंबूर विधानसभा क्षेत्र के विधायक के रूप में दर्ज हों, लेकिन तिरुचिरापल्ली के लोगों का उनके दिल में विशेष स्थान है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले सभी चुनावों में जनता का समर्थन उनकी पार्टी को मिलता रहेगा।
विजय का यह भाषण तमिलनाडु की राजनीति में एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद विजय लगातार अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने और विपक्ष को सीधी चुनौती देने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में राज्य की राजनीति और अधिक दिलचस्प होने की संभावना है।
निष्कर्ष:
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने तिरुचिरापल्ली रैली से स्पष्ट संदेश दिया है कि उनकी पार्टी टीवीके अब राज्य की राजनीति में मुख्य शक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है। खुद को जनता का पहला सेवक बताते हुए उन्होंने डीएमके को सीधी चुनौती दी और राज्य के अधिकारों पर किसी भी समझौते से इनकार किया। आने वाले समय में यह बयान तमिलनाडु की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।


